भारत के तकनीकी इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी सचिव एस. कृष्णन (S. Krishnan) ने सोमवार को इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) 2025 में घोषणा की कि देश का पहला पूर्णत: स्वदेशी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मॉडल इस वर्ष के अंत तक तैयार हो जाएगा। यह घोषणा भारत को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर अग्रणी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।कृष्णन ने अपने संबोधन में बताया कि भारत ने एआई मॉडल्स के विकास के लिए आवश्यक कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में जबरदस्त प्रगति की है। उन्होंने कहा,“जब हमने शुरुआत की थी, तो हमारा लक्ष्य 10,000 जीपीयू (GPUs) तैनात करने का था, लेकिन आज मैं यह बताते हुए गर्व महसूस कर रहा हूं कि भारत ने 38,000 GPUs सफलतापूर्वक स्थापित कर लिए हैं। यह हमारे एआई इकोसिस्टम के विकास के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।” इस मॉडल को इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि यह कई भारतीय भाषाओं में काम कर सके, जिससे देश के दूरदराज़ के क्षेत्रों में भी डिजिटल क्रांति पहुंच सके।विशेषज्ञों का मानना है कि स्वदेशी एआई मॉडल भारत को विदेशी तकनीक पर निर्भरता से मुक्त करेगा और डेटा संप्रभुता (Data Sovereignty) को मजबूत करेगा। इससे भारत का संवेदनशील और स्थानीय डेटा देश की सीमाओं के भीतर सुरक्षित रहेगा।कृष्णन ने बताया कि भारत सरकार इस मॉडल को फरवरी 2026 में होने वाले “India AI Impact Summit” के दौरान औपचारिक रूप से लॉन्च करेगी।इस अवसर पर यह मॉडल प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, वित्त और भाषा अनुवाद जैसे क्षेत्रों में अपनी उपयोगिता प्रदर्शित करेगा। यह पहल भारत की डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) व्यवस्था — जैसे आधार, यूपीआई और ओएनडीसी — को और सशक्त बनाएगी।वर्तमान समय में अमेरिका और चीन जैसे देशों ने अपने-अपने फाउंडेशनल एआई मॉडल विकसित किए हैं, जैसे OpenAI का GPT और Baidu का Ernie Bot। लेकिन भारत का दृष्टिकोण अलग है — यह तकनीक को समावेशी, सुलभ और नैतिक बनाने पर केंद्रित है।भारत का एआई मॉडल स्थानीय डेटा पर आधारित होगा, जिससे यह देश की भाषाओं, बोलियों और सांस्कृतिक संदर्भों को समझ सकेगा। यह उन करोड़ों भारतीयों तक एआई की पहुंच सुनिश्चित करेगा जो अपनी मातृभाषा में संवाद करना पसंद करते हैं।साथ ही, यह मॉडल एआई के नैतिक उपयोग (Ethical AI) पर भी विशेष ध्यान देगा — यानी एल्गोरिदम में पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी। इसके लिए सरकार राष्ट्रीय स्तर पर एआई गवर्नेंस और ऑडिट फ्रेमवर्क तैयार कर रही है।इस परियोजना को सफल बनाने में सरकार के साथ कई शैक्षणिक संस्थान, निजी कंपनियां और अनुसंधान संस्थान मिलकर काम कर रहे हैं। इनमें आईआईटी, आईआईआईटी, सी-डैक (CDAC) और कई प्रमुख एआई स्टार्टअप्स शामिल हैं।
रिपोर्ट – अभिनव गुप्ता
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भारत का पहला स्वदेशी एआई मॉडल इस साल के अंत तक होगा तैयार, फरवरी 2026 में होगा लॉन्च
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