बैंक फ्रॉड केस
सीबीआई की विशेष अदालत लखनऊ (पश्चिम) ने मंगलवार को बैंक धोखाधड़ी के एक मामले में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के दो पूर्व अधिकारियों को दोषी करार दिया है. अदालत ने रिटायर्ड डिप्टी मैनेजर सुभाष चंद्र अग्रवाल और डेस्क ऑफिसर जॉय चक्रवर्ती को तीन साल की कैद और 30 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है. वहीं प्राइवेट कंपनी M/s Addyapolo Projects Pvt. Ltd. पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है. इस केस के चौथे आरोपी और कंपनी के डायरेक्टर क्रांति कुमार सिंह की सुनवाई के दौरान मौत हो गई थी.
क्या था मामला?
सीबीआई ने यह केस 26 मार्च 2010 को एसबीआई की शिकायत पर दर्ज किया था. शिकायत में आरोप था कि क्रांति कुमार सिंह ने फर्जी दस्तावेज़ों के आधार पर बैंक से 5.70 करोड़ रुपये का टर्म लोन लिया. यह लोन तीन फर्जी कंपनियों —एम/एस ज़सोदा ग्लोबल मार्केटिंग, एम/एस आर.के. ट्रेडर्स और एम/एस संभव एंटरप्राइज़ेस के नाम पर जारी कराया गया था.
जांच में पता चला कि इन खातों को खुद आरोपी की तरफ से चलाया जा रहा था और उसने लोन की रकम का इस्तेमाल निर्धारित काम में न करके दूसरी जगहों पर घुमा दी, जिससे बैंक को भारी नुकसान हुआ. पैसा आते ही इनमें से एक चुपचाप हर पैसा अपने खुद के खातों में जमा कर लिया.
लखनऊ के कार्यालयों में छापे मारे
बैंक बेकार के वादे करता रह गया और वादा किया गया उपकरण कभी पूरा नहीं हुआ. एसबीआई के उप महाप्रबंधक की एक व्हिसलब्लोअर शिकायत 26 मार्च, 2010 को सीबीआई तक पहुंची. इसके बाद लखनऊ स्थित कार्यालयों और आवासों पर छापे मारे गए. जांचकर्ताओं ने परिपत्र लेनदेन, रबर-स्टैम्प अनुमोदन और गायब मशीनरी के कागजी निशान का पता लगाया, जो केवल लेटरहेड पर मौजूद थे.
सीबीआई ने जांच के बाद नवंबर 2011 में चारों आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी. अब अदालत ने लंबी सुनवाई के बाद सभी आरोपियों को दोषी पाया और सजा सुनाई.

