प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
बिहार विधानसभा चुनाव की तारीख नजदीक आते ही सियासी सरगर्मी तेज हो गई है. सभी पार्टियों ने अपने-अपने उम्मीदवारों की लिस्ट भी जारी कर दी है. इसी बीच कुम्हरार विधानसभा क्षेत्र से BJP द्वारा कायस्थ का टिकट कटने से नाराज कायस्थों का गुस्सा सड़कों पर उतर आया है. कायस्थों ने BJP के राष्ट्रीय मंत्री ऋतुराज सिन्हा के सामने ही प्रशांत किशोर की पार्टी जनसुराज के उम्मीदवार प्रोफेसर केसी सिन्हा के जिंदाबाद के नारे लगाए. मंत्री के मना करने के बावजूद लोग शांत होने को तैयार नहीं थे.
इस बार बीजेपी ने कुम्हरार से पांच बार विधायक चुने जाने वाले अरुण कुमार सिन्हा का टिकट काट दिया है. अरुण कुमार की जगह पार्टी ने संजय गुप्ता को टिकट दिया है. इसी वजह से कायस्थ समाज बीजेपी से नाराज हैं और उनके खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं. इसी सीट पर कांग्रेस ने इंद्रदीप चंद्रवंशी और जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने प्रोफेसर और लेखक केसी सिंहा को टिकट दिया है.
कायस्थ निभाते हैं अहम भूमिका
दरअसल, कुम्हरार विधानसभा क्षेत्र में कायस्थ हमेशा से निर्णायक भूमिका निभाते आए हैं. यहां कुल वोटर्स की संख्या चार लाख से ज्यादा है, जिसमें अधिकतर संख्या कायस्थ समाज की है. कायस्थों के अलावा यहां यादव, राजपूत, कोइरी, कुर्मी, ब्राह्मण, और मुस्लिम वोटर्स भी अपनी अहम भूमिका दर्ज कराते हैं. बीजेपी कई सालों से इस विधानसभा क्षेत्र में कायस्थों के वोट बैंक को साधने की कोशिश कर रही है.
बिहार की सबसे प्रभावशाली सीट
कुम्हरार सीट बिहार चुनाव के दौरान सबसे अहम सीट मानी जाती है. इस क्षेत्र को पहले पटना सेंट्रल के नाम से जाना जाता था, लेकिन 2008 के परिसीमन के बाद इसका नाम बदलकर कुम्हरार कर दिया गया. यह पूरी तरह शहरी क्षेत्र में आता है. पिछले पांच साल से इस सीट पर बीजेपी अपनी पकड़ बनाए हुए है. 2020 के चुनाव में बीजेपी ने आरजेडी के उम्मीदवार धर्मेंद्र कुमार को भारी मतों से हराकर जीत हासिल की थी.
