प्रदूषण सेहत के लिए खतरा
दिवाली बीत गई है और इसी के साथ प्रदूषण का लेवल भी बढ़ने लगा है. हवा की गुणवत्ता भी खराब लेवल पर है. प्रदूषण का बढ़ना सेहत को कई तरीकों से नुकसान करता है. इसका असर फेफड़ों पर सबसे ज्यादा होता है, लेकिन अब एक रिपोर्ट ने चिंता बढ़ा दी है. अमेरिका की संस्था स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर 2025 की रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में प्रदूषण से होने वाली मौतें तेजी से बढ़ रही है. पॉल्यूशन का असर दिमाग पर भी हो रहा है.
स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर 2025 की रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रदूषण में मौजूद छोटे कण यानी पीएम 2.5 के संपर्क में लंबे समय तक रहने से ब्रेन के टिश्यू तक को नुकसान हो रहा है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पॉल्यूशन डिमेंशिया की बीमारी का भी खतरा बढ़ा रहा है, जिससे याददाश्त पर भी असर हो सकता है, रिपोर्ट में कहा गया है कि पॉल्यूशन के कारण हर साल दुनियाभर में आठ मिलियन लोगों की मौत हो रही है.
इन राज्यों में ज्यादा असर
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में प्रदूषण का सबसे अधिक असर दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में ज्यादा देखा जा रहा है. प्रदूषण के कारण गैर संक्रामक बीमारियां जैसे हार्ट की बीमारी, लंग्स की बीमारियां भी बढ़ रही है. ये लंग्स कैंसर, डायबिटीज. डिमेंशिया का खतरा बढ़ा रहा है बीते एक दशक में वायु प्रदूषण के कारण हार्ट की बीमारियां 27 फीसदी तक बढ़ गई हैं.
जिन लोगों को पहले से अस्थमा, सीओपीडी, लंग्स में इंफेक्शन जैसी बीमारियां हैं उनकी परेशानी ज्यादा बढ़ रही है . ऐसे लोगों में बीमारी के लक्षण लंबे समय तक दिख रहे हैं. बच्चों और बुजुर्गों पर असर अधिक देखा जा रहा है.
दिमाग को प्रदूषण कैसे पहुंचा रहा नुकसान
इस अध्ययन में कहा गया है कि पॉल्यूशन से डिमेंशिया, अल्जाइमर तक का खतरा है. लोगों की यादादश्त कमजोर हो रही है और बुजुर्गों पर इसका असर ज्यादा देखा जा रहा है. प्रदूषण के कण सांस के जरिए शरीर में जाते हैं और फिर खून में मिलकर बीमारियों का कारण बनते हैं. ये कण ब्रेन के टिश्यू में जाते हैं और ब्रेन के फंक्शन पर असर डालते हैं. इससे लोगों कोयाददाश्त कमजोर होने के साथ साथ किसी काम में फैसला लेने की क्षमता पर भी असर पड़ा है. कारण ये हैं कि प्रदूषण ब्रेन फंक्शन पर असर डाल रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, जिन इलाकों में प्रदूषण ज्यादा है वहां ब्रेन पर असर अधिक देखा जा रहा है. यहां लोगों की यादादश्त से संबंधित परेशानियां ज्यादा देखी जा रही है.
बचाव के लिए क्या करें
दिल्ली के राजीव गांधी अस्पताल में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ अजीत जैन बताते हैं कि प्रदूषण से बचाव के लिए जरूरी है कि आप नाक और मुंह को ढककर रखें ताकि प्रदूषक सीधे फेफड़ों में न पहुंचें. कोशिश करे कि बाहर जाते समय हमेशा मास्क लगाकर रखें.गर्म पानी से गरारे करें और दिन में एक-दो बार भाप लें, इससे सांस की नलियां साफ रहती हैं. जिनको अस्थमा या सीओपीडी की समस्या है वह अपने साथ जरूरी दवाएं और इन्हेंलर रखें और हृदय रोगियों को अगर सीने में भारीपन, सांस फूलना या थकान महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.
