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क्बीते कुछ दिनों से मौसम बदल रहा है और प्रदूषण का स्तर पर भी बढ़ रहा है. इसका असर बच्चों की सेहत पर भी पड़ रहा है. बच्चों को सांस संबंधित परेशानी हो रही है. ऐसे में कुछ माता- पिता बच्चों को घर पर ही नेबुलाइजर दे रहे हैं, लेकिन कुछ मामलों में इसका असर उल्टा पड़ रहा है. क्योंकि लोग बिना डॉक्टर की सलाह के इसका यूज कर रहे हैं. ऐसे में दवा की डोज और देने का तरीका नुकसान कर रहा है. बच्चों को नेबुलाइजर कब देना चाहिए. इस दौरान किन बातों का ध्यान रखें इसके बारे में एक्सपर्ट्स से जानते हैं.
एम्स नई दिल्ली में पीडियाट्रिशियन डॉ हिमांशु भदानी बताते हैं कि कुछ माता- पिता को लगता है कि नेबुलाइजर केवल एक भांप देने वाली मशीन है, लेकिन ऐसा नहीं है. इसमें जो दवा डाली जाती है वह फेफड़ों के लिए होती है. अगर उस दवा की डोज जरूरत से ज्यादा या कम हो जाए तो ये बच्चे की सेहत को नुकसान भी कर सकती है.
कुछ मामले भी आते हैं जहां नेबुलाइजर का यूज गलत तरीके से करने से बच्चे की सेहत बिगड़ गई थी. ऐसे में दवाओं का ध्यान रखना चाहिए. इस बात का भी ध्यान रखें कि हल्की परेशानी में नेबुलाइजर न दें. अगर बच्चे को हल्की खांसी है तो केवल भांप देने से ही काम चल सकता है.
किस परेशानी में कौन सी दवा दी जाती है?
डॉ. भदानी बताते हैं कि नेबुलाइर में कई तरह की मेडिसिन दी जाती हैं. ये सभी अलग- अलग स्वास्थ्य समस्याओं के लिए होती हैं. जैसेसांस फूलने, अस्थमा के लक्षणों के लिए Asthalin (Salbutamol) दी जाती है. सूजन के लिएBudesonide और ब्रोंकाइटिस के लिएLevolin, Duolin दे सकते हैं, लेकिन इनमें से कोई भी दवा आपकोकेवल डॉक्टर की सलाह पर ही देनी चाहिए. इस दौरान डोज का भी ध्यान रखें. डोज उतनी ही होनी चाहिए जितना डॉक्टर ने बताया है.
नेबुलाइज़र देते समय किन बातों का ध्यान रखें
मशीन और मास्क को हर इस्तेमाल के बाद साफ करें.
दवा डालने से पहले डॉक्टर की प्रिस्क्रिप्शन ज़रूर देखें.
बच्चे को सीधा बैठाकर नेबुलाइज़ करें.
अगर बच्चे को खांसी, घबराहट या सांस तेज हो जाए तो तुरंत रोकें

