नगर निगम ने 15 दिन में घर खाली करने का दिया नोटिस
उत्तर प्रदेश में बरेली के डे़लापीर तालाब के पास रहने वाले दलित और OBC परिवारों की दिवाली इस बार डर और अनिश्चितता में बदली हुई दिख रही है. नगर निगम ने 12 मकानों को नोटिस देकर 15 दिन में खाली करने का निर्देश दिया है. और मकान 25 अक्टूबर तक खाली करने का अल्टीमेटम दिया गया है.
दरअसल, यहां रहने वाले का कहना है कि वे 50-60 साल से इसी जगह पर रहते आ रहे हैं. उस वक्त यह क्षेत्र जंगल हुआ करता था, जमीन सस्ती थी और उन्होंने मेहतन से छोटे-छोटे किस्तों में पैसे जोड़कर, दिन-रात काम करके अपने-अपने घर बनवाए. उन घरों में जन्म, शादियां और हर जीवन की यादें जुड़ी हैं. अब अचानक इन्हें अवैध बताकर खाली कराने की चेतावनी ने लोगों की नींद उड़ा दी है.
नोटिस मिलने के बाद दहशत में लोग
जिन लोगों के नाम नोटिस जारी किया गया है उनमें 12 घरों के सभी लोगों OBC और दलित समुदाय से हैं. लोगों ने कहा कि हाउस टैक्स, वाटर टैक्स और बिजली के बिल नियमित रूप से भरते हैं और राशन कार्ड जैसी सरकारी सुविधाएं भी लेते हैं. इसके बावजूद उन्हें डर है कि वोट देकर जिन नेताओं को उन्होंने सत्ता में पहुंचाया, वही अब उनके घरों पर बुलडोजर चलवा देंगे.
कई लोगों ने कहा कि वे पहले भी विभिन्न सरकारों को वोट देते रहे कांग्रेस, सपा, बसपा और खासकर भाजपा पर कभी किसी ने इस तरह से घर उजाड़ने जैसा कदम नहीं उठाया. लेकिन कई साल से भाजपा सरकार को वोट देते चले आ रहे है तब भी हमारे घर तोड़े जा रहे हैं.
महिलाओं ने रो-रोकर सुनाया अपना दर्द
महिलाओं और बच्चों के बयान में दर्द साफ झलक रहा था. इतना ही नहीं 60-70 साल की बुज़ुर्ग महिलाएं रोती हुईं मिलीं. उन्होंने कहा, बेटा हमारा घर मत छीनना. कई परिवारों की आर्थिक हालत बेहत नाजुक है, रोज कमाने-खाने वाले हैं और सोच रहे हैं कि अगर घर टूट गया तो कहां जाएंगे. वहीं लोगों ने कहा कि उनके घरों में चूल्हा तक नहीं जल रहा नोटिस मिलते ही घरों का माहौल बदल गया है.
‘हमारा घर मत तोड़ो’
वहीं एक 8वीं की छात्रा ने भावुक अपील की हमारा जन्म यहीं हुआ है. हमारे पास राशन कार्ड है, सरकारी टंकी यहां लगी है. अगर घर पर बुलडोजर चला गया तो हम कहां जाएंगे. मोदी-योगी हमें रहने की जगह दो, हमारा घर मत तोड़ो. मेरी पढ़ाई बंद हो जाएंगी, मेरे पापा किराया नहीं दे पाएंगे. वहीं कुछ परिवारों की बेटियों की शादी तय है और वे सोच रहे हैं कि शादी और घर दोनों कैसे सम्भालेंगे, अगर मकान उजड़ गया.
लोगों ने यह भी कहा कि वे कई बार मेयर और स्थानीय विधायकों के पास गए, लेकिन मदद नहीं मिली. नेताओं ने हाथ उठाकर जवाब दे दिया. कुछ लोगों ने यह भी बताया कि लखनऊ और गोरखपुर जाकर उन्होंने मुख्यमंत्री से मिलने की भी कोशिश की पर कोई समाधान नहीं निकला.
