असदुद्दीन ओवैसी.
बिहार चुनाव में असदुद्दीन ओवैसी महागठबंधन का हिस्सा बनने की गुहार लगाते रहे और सिर्फ 5 सीटें मांगते रहे, लेकिन कांग्रेस-राजद ने उनको बीजेपी की ‘बी’ टीम बताकर गठबंधन में शामिल करने से इनकार कर दिया. नतीजे आए तो कांग्रेस 6 सीटें जीत पाई तो ओवैसी अकेले दम पर 5 सीटें जीते. साथ ही ओवैसी की पार्टी AIMIM ने कई सीटों पर महागठबंधन का खेल भी बिगाड़ा.
इसके बाद महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय और बीएमसी चुनाव में ओवैसी की पार्टी ने जोरदार प्रदर्शन करके सबको चौंका दिया. ओवैसी की पार्टी ने प्रदेश के 13 कारपोरेशन में 124 सीटें जीतीं, जिसमें छत्रपति संभाजीनगर में कांग्रेस को पछाड़कर 33 सीटें जीतीं.
विदर्भ में 21, मालेगांव में 21, नांदेड़ में 14, धुले में 10 और सोलापुर में 8 सीटों पर जीत हासिल की. वहीं, बीएमसी चुनाव में पवार के दोनों धड़ों और मनसे से ज्यादा पार्टी के 8 पार्षद जीतकर आए.
हुमायूं कबीर और बदरुद्दीन से गठबंधन की चर्चा
ऐसे में ओवैसी की पार्टी से अब बंगाल में हुमायूं कबीर, असम में बदरुद्दीन अजमल की पार्टी के साथ गठजोड़ की चर्चा है, जिसने कांग्रेस का सिरदर्द बढ़ाया है. ये वही कांग्रेस है, जो ओवैसी को अरसे से कट्टर और बीजेपी की ‘बी’ टीम बताती आई है. एक वक्त ओवैसी यूपीए गठबंधन का हिस्सा रहे, लेकिन मोदी जब केंद्र की सियासत में आए तो ध्रुवीकरण की आशंका से कांग्रेस ने ये स्टैंड लिया.
ये भी पढ़ें- ओवैसी ने अजीत डोभाल पर साधा निशाना, बोले NSA इतिहास में कमजोर
वैसे मामला सिर्फ इन दो राज्यों का नहीं है. बात उत्तर प्रदेश की भी है, जहां सपा-कांग्रेस गठबंधन मुस्लिम मतों के एकतरफा अपने पक्ष में मानता आया है, लेकिन ओवैसी की पार्टी के हालिया प्रदर्शन की तरह कहीं वो यूपी में भी इंडिया ब्लॉक को बड़ा नुकसान न पहुंचा दें.
AIMIM की बढ़ती ताकत से बढ़ी चिंता
दरअसल, इंडिया ब्लॉक को लगता है कि उसकी सेकुलर वोटों की सियासत में कहीं मुस्लिमों का वर्ग मुस्लिम नेता ओवैसी और राज्यों के इंडिया ब्लॉक से अलग मुस्लिम नेताओं की राह न पकड़ ले. अंदरखाने पार्टी के नेता और इंडिया ब्लॉक के दल इस पर चर्चा शुरू कर चुके हैं. वैसे भी सियासत में कोई परमानेंट दोस्त या दुश्मन नहीं होता, चुनावी जीत सबसे अहम होती है.
SP सांसद रमा शंकर राजभर कह रहे है aimim का गठबंधन मे स्वागत है,
और जब घर जाओ तो दरवाज़ा बंद कर लेते है …
सांसद जी को चाहिए यही दावत नामा श्री @yadavakhilesh जी के जरिये हमको भिजवा दे,
हम ज़रूर गौर करेंगेआसिम वाक़र
Chief spokesperson
Aimim pic.twitter.com/e7XrUzl8An— syed asim waqar (@syedasimwaqar) January 21, 2026
AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता आसिम वाकर का बयान चर्चा में है. आसिम वकार ने कहा कि सपा सांसद रमा शंकर राजभर कह रहे है कि AIMIM का गठबंधन में स्वागत है और जब घर जाओ तो दरवाजा बंद कर लेते है. सांसद को चाहिए यही दावत नामा अखिलेश यादव के जरिये हमको भिजवा दें, हम जरूर गौर करेंगे.
ओवैसी को लेकर क्या कांग्रेस की बदलेगी रणनीति?
वैसे ऐसा भी नहीं है कि कांग्रेस और इंडिया ब्लॉक के साथ ओवैसी को जोड़ने वाला पुल पूरी तरह टूटा हो. तेलंगाना में सीएम रेवंत रेड्डी के ओवैसी बंधुओं के रिश्तों की शानदार ट्यूनिंग गाहे-बगाहे सामने आती रही है. राज्य में कई मौकों पर चुनावों में आपसी समझ भी दिखाई दी. हाल में खुद ओवैसी ने जुबली हिल्स के उपचुनाव में खुद उम्मीदवार न देकर कांग्रेस उम्मीदवार का प्रचार किया और कांग्रेस सीट जीत भी गयी, जहां से विधानसभा चुनाव में पूर्व क्रिकेटर अजहरुद्दीन हार गए थे.
ये भी पढ़ें- मैं चुनाव लड़ता रहूंगा, मेरी सफलता से जलते हैं लोग, BJP से मैच-फिक्सिंग के आरोपों पर ओवैसी का पलटवार
कुल मिलाकर ओवैसी के हालिया जलवे ने कांग्रेस और इंडिया ब्लॉक के कलेजे को जलाया तो जरूर है. ऐसे में अब वो सेकुलर वोटों को साधने के लिए अंदरखाने रणनीति पर नए सिरे चर्चा शुरू हो चुकी है, लेकिन कांग्रेस और इंडिया ब्लॉक के हाल तक लिए गए स्टैंड के बाद नया फैसला लेना इतना आसान भी नहीं है, उसे बीजेपी को सियासी मौका देना और हिंदू मतों के खिसकने का डर भी लाजमी है.

