वंदे भारत एक्सप्रेस
उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद के लोगों को रेलवे ने बड़ी सौगात दी है. 7 नवंबर से मुरादाबाद रेल मंडल में एक नई सुविधा शुरू होने जा रही है. इस दिन से लखनऊ से मुरादाबाद के रास्ते सहारनपुर तक वंदे भारत एक्सप्रेस का संचालन आरंभ किया जाएगा. इस रूट पर ट्रेन शुरू होने से नैमिषारण्य और सीतापुर में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को विशेष सुविधा मिलेगी.
यह पहली बार है जब लखनऊ से सीतापुर के लिए वंदे भारत एक्सप्रेस जोड़ी जा रही है. ट्रेन संख्या 26504 वंदे भारत एक्सप्रेस सोमवार को छोड़कर सप्ताह के छह दिन लखनऊ जंक्शन से सुबह 5 बजे रवाना होगी. ट्रेन 5 बजकर 55 मिनट पर सीतापुर पहुंचेगी और इसके बाद शाहजहांपुर, बरेली, मुरादाबाद, नजीबाबाद, रुड़की होते हुए दोपहर 1 बजकर 45 मिनट पर सहारनपुर पहुंचेगी.
क्या होगा रूट?
वापसी में ट्रेन संख्या 26530 वंदे भारत एक्सप्रेस सोमवार को छोड़कर छह दिन सहारनपुर से दोपहर 3 बजे रवाना होगी. यह रुड़की, नजीबाबाद, मुरादाबाद और बरेली होते हुए सीतापुर 9 बजकर 50 मिनट पर रात तक पहुंचेगी, जबकि लखनऊ जंक्शन रात 11 बजे पहुंचेगी. ट्रेन संचालन को लेकर रेल मंत्री ने कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर जानकारी साझा की थी, जिसके बाद आधिकारिक समय सारिणी और नोटिफिकेशन जारी किया गया.
नैमिषारण्य 88,000 ऋषियों की तपोभूमि
नैमिषारण्य, सीतापुर जिले में गोमती नदी के तट पर बसा एक प्रमुख तीर्थस्थान है, जो लखनऊ से लगभग 80 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. इसे 88,000 ऋषियों की तपोभूमि कहा जाता है और ‘तीर्थों का तीर्थ’ माना गया है. माना जाता है कि यहीं पर महापुराण और सत्यनारायण कथा की रचना हुई थी. यहां चक्र तीर्थ, ललिता देवी मंदिर, हनुमान गढ़ी और कई अन्य पवित्र स्थल हैं.
नैमिषारण्य के मुख्य आकर्षण
नैमिषारण्य एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है, जिसे ऋषियों की तपस्या स्थली के रूप में जाना जाता है. इस पवित्र भूमि का मुख्य आकर्षण यहां का चक्र कुंड है, जिसके बारे में यह मान्यता है कि यह भगवान ब्रह्मा के चक्र से जुड़ा हुआ है. नैमिषारण्य को ऋषि दधीचि की महान त्याग-भूमि के रूप में भी याद किया जाता है, जिन्होंने इंद्रदेव के लिए यहीं पर अपनी अस्थियां दान की थीं, जिससे प्रसिद्ध वज्र का निर्माण हुआ था. यहां अनेक प्रमुख मंदिर स्थित हैं, जिनमें ललिता देवी, श्री नारद, और पंचपांडव मंदिर शामिल हैं.
महाभारत से भी है संबंध
इस स्थान का संबंध महाभारत काल से भी है, जहां अर्जुन और युधिष्ठिर ने भी दर्शन किए थे. यहां एक विशेष मूर्ति भी स्थापित है, जिसमें हनुमान जी के कंधों पर भगवान राम और लक्ष्मण विराजमान हैं. नैमिषारण्य में कोस की परिक्रमा की जाती है, जिसे स्वयं भगवान राम और कृष्ण ने पूर्ण किया था. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नैमिषारण्य की यात्रा किए बिना हिंदू धर्म की पवित्र चारधाम यात्रा भी अधूरी मानी जाती है.

