बिजनौर में जीवन रक्षक नशा मुक्ति केंद्र अब ‘नशा मुक्ति’ नहीं बल्कि ‘जीवन मुक्ति केंद्र’ बन चुके हैं. कहीं नशा छुड़ाने के लिए भर्ती मरीज की गला दबाकर हत्या की जा रही है, तो कहीं बिजली का करंट देकर उसकी जान ले ली जाती है. किसी को हाथ-पैर बांधकर इतना मारा जाता है कि उसकी मौत हो जाती है.
31 अक्टूबर को चक्कर रोड स्थित नशा मुक्ति केंद्र, बिजनौर में 22 वर्षीय प्रीत नाम के युवक की मौत हो गई. केंद्र के कर्मचारियों ने मौत का कारण छत से गिरना बताया, वहीं प्रीत के परिजनों का कहना है कि उसके पूरे शरीर पर चोटों के निशान हैं. उन्हें शक है कि प्रीत को यातनाएं देकर मारा गया है. चेहरे, सिर, हाथ और पैरों पर बने घाव और चोट के निशान भी यातनाओं की गवाही दे रहे हैं.
धारूवाला मंडावली निवासी प्रीत पिछले छह माह से बिजनौर के चक्कर रोड स्थित नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती था. जब परिजन केंद्र पहुंचे और सीसीटीवी फुटेज मांगी तो संचालक ने बताया कि कैमरे खराब होने की वजह से सीसीटीवी बंद हैं. इस पर परिजनों ने हंगामा किया, जिसके बाद संचालक केंद्र छोड़कर फरार हो गया. उसके साथ ही इलाज के लिए भर्ती अन्य लोग भी केंद्र से भाग निकले. अब प्रीत के परिजन केंद्र संचालक पर हत्या का आरोप लगा रहे हैं.
बिजनौर में नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती मरीज की मौत का यह पहला मामला नहीं है. पिछले एक साल में यह सातवां मामला है, जिसमें नशे से मुक्ति के नाम पर मरीज की जान चली गई. इससे पहले भी दो अन्य केंद्रों में चार युवकों की मौत हो चुकी है.
लाखों रुपये की ग्रांट हासिल करने के लिए नशा मुक्ति केंद्र कुकुरमुत्तों की तरह खुल गए हैं. इन केंद्रों की न तो कोई नियमित जांच होती है, और न ही किसी प्रकार का रिकॉर्ड रखा जाता है. नशे की लत छुड़ाने और नशा उन्मूलन के नाम पर केंद्र और राज्य सरकार से मिलने वाला बजट अक्सर संचालक हड़प जाते हैं.
इन केंद्रों में न तो देखरेख के लिए प्रशिक्षित स्टाफ होता है और न ही डॉक्टर नियुक्त होते हैं. अधिकांश नशा मुक्ति केंद्र खुद अव्यवस्थाओं से ग्रस्त हैं. वहीं बिजनौर के एएसपी गौतम राय ने बताया कि पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है. जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

