नबीनगर विधानसभा सीट.
नबीनगर विधानसभा चुनाव रिजल्ट 2025 Live Updates: बिहार में दो चरणों के मतदान के बाद आज यानी शुक्रवार को नतीजे आ जाएंगे. बिहार के हाई प्रोफाइल विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में से एक रही नबीनगर विधानसभा की बात करें तो इस बार यहां मुख्य मुकाबला आरजेडी के आमोद चंद्रवंशी और जेडीयू के चेतन आनंद के बीच रहा. वहीं जेएसपी ने अर्चना चंद्रा को मैदान में उतारा था. अब थोड़ी ही देर में शुरुआती रुझान आने शुरू हो जाएंगे.
शुरुआती दशकों में कांग्रेस का रहा दबदबा
नबीनगर विधानसभा सीट औरंगाबाद जिले में आती है और काराकाट लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है. शुरुआती दशकों की बात करें तो इस सीट पर कांग्रेस का दबदबा रहा है. कांग्रेस ने 1990 तक 8 बार नबीनगर पर कब्जा जमाया. इस बीच एक-एक बार सीपीआई और जनता पार्टी के भी विधायक रहे. 1995 में वीरेंद्र सिंह ने नबीनगर में जनता दल का परचम लहराया.
1996 के उपचुनाव में बाहुबली पूर्व सासंद आनंद मोहन की पत्नी लवली आनंद यहां से विधायक चुनी गईं. इसके बाद आरजेडी के भीम यादव दो बार जीते. 2005 में विजय सिंह ने एलजेपी को पहली बार यहां जीत दिलाई. इसके बाद 10 साल यह सीट जेडीयू के पास रही और वीरेंद्र सिंह लगातार दो बार विधायक रहे.
2020 में किसने मारी बाजी
2020 के विधानसभा चुनाव में आरजेडी के विजय सिंह ने जेडीयू के वीरेंद्र सिंह को हराया था, जबकि रालोसपा से लड़े धर्मेंद्र कुमार करीब 23 हजार वोट लाकर तीसरे नंबर पर रहे थे. नबीनगर विधानसभा सीट पर राजपूत जाति के अलावा यादव और रविदास वोटर निर्णायक भूमिका में रहते हैं.
सिन्हा परिवार का बड़ा असर
सिन्हा परिवार ने दशकों तक नबीनगर की राजनीति को आकार दिया. 1957 को छोड़कर, नबीनगर विधानसभा सीट पर पहले चार चुनावों में बिहार की राजनीति के दो दिग्गज पिता-पुत्र अनुग्रह नारायण सिन्हा और सत्येंद्र नारायण सिन्हा ने जीत हासिल की थी.
अनुग्रह नारायण सिन्हा बिहार के पहले उपमुख्यमंत्री रहे, जबकि उनके पुत्र सत्येंद्र नारायण सिन्हा मुख्यमंत्री बने और 1989 से 1990 के बीच लगभग नौ महीने तक इस पद पर रहे. उनके पुत्र निखिल कुमार, जो एक प्रतिष्ठित आईपीएस अधिकारी और दिल्ली पुलिस के पूर्व आयुक्त हैं, ने भी सेवानिवृत्ति के बाद राजनीति में कदम रखा और 2004 से 2009 के बीच औरंगाबाद से एक कार्यकाल के लिए सांसद रहे. उनकी पत्नी श्यामा सिंह भी 1999 से 2004 तक औरंगाबाद से सांसद रहीं.
सत्येंद्र नारायण सिंह औरंगाबाद से छह कार्यकाल के लिए सांसद रहे, जबकि उनकी पत्नी किशोरी सिन्हा 1980 से 1989 के बीच वैशाली निर्वाचन क्षेत्र से दो बार सांसद रहीं. हाल के वर्षों में, नबीनगर आरजेडी-जेडीयू के बीच चुनावी रणक्षेत्र बन गया है. आरजेडी ने 2000, 2005 और 2020 में जीत हासिल की, जबकि जेडीयू 2010 और 2015 में विजयी हुई. एलजेपी ने 2005 में कुछ समय के लिए सीट छीन ली. 2020 में, आरजेडी ने जेडी(यू) को 20,121 वोटों से हराया.
जातीय समीकरण
नबीनगर विधानसभा क्षेत्र में अनुसूचित जाति के मतदाता लगभग 24.25 प्रतिशत हैं, जबकि मुस्लिम मतदाता लगभग 5.4 प्रतिशत हैं. नबीनगर की 93.85 प्रतिशत आबादी गांवों में रहती है. यहां केवल 6.15 प्रतिशत मतदाता शहरों में रहती है.
1951 में एक विधानसभा क्षेत्र के रूप में स्थापित होने के बाद से, नबीनगर (काराकाट लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत) में एक उपचुनाव सहित 18 चुनाव हुए हैं. शुरुआती दशकों में कांग्रेस ने आठ जीत के साथ अपना दबदबा बनाए रखा, उसके बाद आरजेडी (तीन), जेडीयू (दो) और भाकपा, जनता पार्टी, एलजेपी और बिहार पीपुल्स पार्टी को एक-एक जीत मिली.
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