अमेरिका और ईरान के बीच हुए नए समझौते को लेकर जहां वाशिंगटन इसी बड़ी कूटनीतिक सफलता बता रहा। वहीं इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेहू इस डील से पूरी तरह संतुष्ट नजर नहीं आ रहे। नेतन्याहू ने साफ शब्दों में कहा है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना इजराइल की सबसे बड़ी प्राथमिकता है और इस मुद्दे पर उनकी और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की सोच हमेशा एक जैसी नहीं होती। अमेरिका और ईरान समझौते के सार्वजनिक होने के बाद नेतन्याहू ने कहा कि इजराइल ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर ईरान से पैदा हुए परमाणु खतरे को काफी हद तक कमजोर किया है। लेकिन लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई। समझौता हो या ना हो ईरान को कभी परमाणु हथियार नहीं बनाने दिया जाएगा।
नेतन्याहू ने कहा कि ट्रंप और उनके बीच मजबूत साझेदारी लेकिन कई बार दोनों नेताओं की राय अलग भी हो सकती है। उनके मुताबिक इजराइल अपनी सुरक्षा को लेकर कोई समझौता नहीं करेगा और ईरान के परमाणु कार्यक्रम के खिलाफ कार्रवाई जारी रखेगा। उन्होंने कहा कि दशकों से ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना उनका मिशन रहा है और वह भविष्य में भी इसी नीति पर कायम रहेंगे। इजराइली प्रधानमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान और उसके सहयोगी संगठन के खिलाफ अभियान अभी जारी रहेगा। उन्होंने लेबनान का जिक्र करते हुए कहा कि इजराइली सेना जरूरत पड़ने तक सुरक्षा क्षेत्रों में मौजूद रहेगी और किसी भी संभावित खतरे को रोकने के लिए कारवाई की पूरी स्वतंत्रता बनाए रखेगी। नेतन्याहू के मुताबिक हाल के सैन अभियानों में इजराइल ने ऐसे कई इलाकों पर नियंत्रण हासिल किया जिनका इस्तेमाल पहले उसके खिलाफ किया जाता था। दरअसल नेतन्याहू का यह बयान ऐसे वक्त पर सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच लंबे तनाव के बाद एक समझौते की रूपरेखा सामने आई।
वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि ईरान ने यह वादा किया है कि वो किसी परमाणु हथियार को नहीं बनाएगा। ट्रंप ने उन खबरों को भी खारिज किया जिनमें कहा गया था कि अमेरिका ईरान को $300 अरब डॉलर की आर्थिक सहायता देगा। उन्होंने इसे पूरी तरह फर्जी बताया। वहीं अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे डी वांस ने भी इस समझौते का समर्थन करते हुए कहा कि ट्रंप की कूटनीति एक बार फिर सफल रही और इस डील का सबसे बड़ा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान परमाणु हथियार विकसित ना करें। अमेरिकी प्रशासन के अनुसार यह समझौता भविष्य की बातचीत का ढांचा तैयार करता है जिसमें परमाणु निरीक्षण, यूरेनियम एनरचमेंट की निगरानी और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दे शामिल थे। वहीं सूत्रों के मुताबिक समझौते के तहत ईरान को कुछ आर्थिक राहत मिल सकती है। लेकिन यह राहत तभी मिलेगी जब तेहरान परमाणु कार्यक्रम पर निगरानी और सत्यापन की शर्तों का पालन करें।
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