डीएसपी ऋषिकांत शुक्ला
उत्तर प्रदेश में एनकाउंटर स्पेशलिस्ट कहे जाने वाले डीएसपी ऋषिकांत शुक्ला अब खुद गंभीर आरोपों के घेरे में हैं. उन पर भ्रष्टाचार के जरिए अकूत संपत्ति जुटाने के आरोप लगे हैं. कानपुर में एक दशक से अधिक समय तक तैनात रहे शुक्ला के ठिकानों और करीबियों के खिलाफ जांच की तैयारी हो रही है. डीएसपी ऋषिकांत शुक्ला पर आरोप है कि वकील अखिलेश दुबे के साथ मिलकर निर्दोषों को फंसाया और पैसे वसूले.
एक समय ऐसा भी था, जब ऋषिकांत शुक्ला की पहचान एक तेजतर्रार अफसर के रूप में होती थी. उनके माता-पिता उन्हें कलेक्टर बनाना चाहते थे, लेकिन शुक्ला को बचपन से ही खाकी वर्दी का जुनून था. 1997 में उन्होंने पुलिस सेवा में भर्ती होकर बतौर सब-इंस्पेक्टर अपना करियर शुरू किया. शुक्ला को एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के नाम से ख्याति मिली, जब उन्होंने डी-2 गैंग के कुख्यात अपराधियों रफीक और बिल्लू को मुठभेड़ में ढेर किया. पुलिस करियर में उन्होंने 22 से अधिक शातिर अपराधियों का एनकाउंटर किया है.
अजय कंजा-राजेश करिया का एनकाउंटर
एक दशक पहले जब पूर्वांचल के माफिया कानपुर में पैर पसारने लगे थे, तब तत्कालीन एसएसपी ने उनपर लगाम लगाने की जिम्मेदारी ऋषिकांत शुक्ला को सौंपी थी. उन्होंने मुन्ना बजरंगी (जिसकी जेल में हत्या हो चुकी) के शूटर अमित राय को महज 24 घंटे के भीतर एनकाउंटर में ढेर कर दिया था. 2007 में उन्होंने चिंटू सिंह को किदवई नगर के पास एनकाउंटर किया, जबकि अजय कंजा, तन्नू पासी, राजेश करिया और इरफान चिकना जैसे कुख्यात अपराधी भी उनके एनकाउंटर लिस्ट में शामिल रहे.
ऋषिकांत शुक्ला ने 2005 से 2009 के बीच कानपुर के नौबस्ता, कोहना और काकादेव जैसे संवेदनशील थानों की जिम्मेदारी संभाली. बाद में उन्हें आईजी आलोक सिंह के अधीन क्राइम ब्रांच में भी पदस्थ किया गया, जहां उनके मुखबिर नेटवर्क ने कई संगठित अपराधों के खुलासे में अहम भूमिका निभाई. वह अकबरपुर (कानपुर देहात) कोतवाली के प्रभारी भी रहे. यहां तैनाती के तुरंत बाद उन्होंने अपराधियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था.
अखिलेश दुबे से करीबी संबंध
डीएसपी ऋषिकांत शुक्ला और माफिया अखिलेश दुबे के बीच संबंधों का खुलासा ऑपरेशन महाकाल के दौरान हुआ, जिसे पूर्व कानपुर पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार ने शुरू किया था. इस विशेष अभियान का उद्देश्य जबरन वसूली और फर्जी केस रैकेट में शामिल पुलिसकर्मियों, वकीलों और पत्रकारों के गठजोड़ को बेनकाब करना था.
ऑपरेशन के दौरान गिरफ्तार किए गए अखिलेश दुबे पर आरोप था कि वह लोगों को झूठे मामलों में फंसाकर उनसे करोड़ों रुपये वसूलता था. इसी जांच में डीएसपी ऋषिकांत शुक्ला का नाम भी सामने आया. विशेष जांच दल (SIT) को कुल 52 शिकायतें मिलीं, जिनमें से एक दर्जन से अधिक सीधे तौर पर शुक्ला से संबंधित थीं.
जांच में यह भी सामने आया कि कानपुर और आसपास के इलाकों में शुक्ला की करीब 12 प्रमुख संपत्तियां हैं. बताया जाता है कि अपनी लगभग दस साल की कानपुर तैनाती के दौरान उन्होंने पॉश इलाकों में 11 दुकानें और 12 प्लॉट अपने नाम या करीबी रिश्तेदारों के नाम पर खरीदे. जांच एजेंसियां अब इन सभी संपत्तियों और शुक्ला के आर्थिक लेन-देन की गहराई से जांच कर रही हैं.
अब जबकि ऋषिकांत शुक्ला के खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच शुरू हो चुकी है, पुलिस महकमे में हलचल मच गई है. जो अफसर कभी अपराधियों के लिए खौफ का दूसरा नाम था, वही अब खुद जांच एजेंसियों के निशाने पर है.

