भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चली आ रही व्यापार वार्ता को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। फरवरी 2025 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत शुरू होने के बाद अब इस हफ्ते अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर भारत दौरे पर आ रहे हैं। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गौर ने खुद इस बात की जानकारी दी है कि दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर जल्द नई दिल्ली पहुंच रहे हैं और उनकी केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के साथ कई दौर की बैठकें तय हैं।
अमेरिकी राजदूत का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब दोनों देशों के बीच अंतरिम व्यापार समझौते और बटरल ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर बातचीत निर्णायक चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है। वहीं अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय ने भी पुष्टि की है कि जेमिसन ग्रीन भारत दौरे के दौरान भारतीय अधिकारियों के साथ व्यापारिक मुद्दों पर चर्चा करेंगे और माना जा रहा है कि इस दौरान अंतरिम समझौते की रूपरेखा और आगे की रणनीति पर विस्तार से विचार किया जाएगा। यह घटनाक्रम हाल ही में G7 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात के बाद सामने आया है। अमेरिका का कहना है कि फरवरी 2025 में दोनों नेताओं के बीच हुई चर्चा के बाद व्यापार समझौते को लेकर बातचीत को गति मिली और अब उसे आगे बढ़ाने के लिए उच्च स्तरीय संपर्क बढ़ाए जा रहे हैं। अब एक सवाल कि अमेरिकी प्रतिनिधि का यह दौरा क्यों अहम होने वाला है? देखिए भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंध लगातार मजबूत हुए हैं।
दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार $90 अरब डॉलर से अधिक के स्तर पर पहुंच चुका है। दोनों सरकारें आने वाले सालों में इस आंकड़े को और बढ़ाना चाहती हैं। ऐसे में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि का भारत दौरा इस बात का संकेत माना जा रहा है कि दोनों देश लंबित मुद्दों पर सहमति बनाने की कोशिश में जुटे हैं। वहीं अगर बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है तो पहले अंतरिम समझौते पर सहमति बन सकती है। जिसके बाद व्यापक व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने का रास्ता आसान हो जाएगा। हालांकि दोनों देशों के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है। लेकिन कुछ अहम मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई है। भारत चाहता है कि अमेरिका भारतीय निर्यात पर लगाए गए कुछ टेररिफ में राहत दें। जबकि अमेरिका भारतीय बाजार में अपने कृषि और खाद्य उत्पादों के लिए ज्यादा पहुंच की मांग कर रहा है। इसके अलावा डेयरी उत्पाद, कृषि क्षेत्र, डिजिटल व्यापार, मेडिकल उपकरणों और ई-कॉमर्स से जुड़े नियम भी बातचीत के प्रमुख मुद्दों में शामिल हैं। भारत घरेलू किसानों और छोटे उद्योगों के हितों को देखते हुए कुछ क्षेत्रों में सावधानी बरत रहा है। जबकि अमेरिका बाजार को अधिक खोलने की मांग कर रहा है। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप पहले भी कई बार भारत की टेररिफ नीति की आलोचना कर चुके हैं। ट्रंप प्रशासन का मानना रहा है कि अमेरिकी कंपनियों को भारतीय बाजार में अधिक अवसर मिलने चाहिए। वहीं भारत का कहना है कि विकासशील अर्थव्यवस्था होने के नाते उसे अपने संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए कुछ शुल्क व्यवस्था बनाए रखने की जरूरत है।
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