अक्षरा सिंहImage Credit source: Instagram/singhakshara
भारत में आपको हर राज्य मेंअलग-अलग संस्कृति, रिवाज, खान पान और पहनावा देखने को मिलेगा. वहीं अगर हम बिहार की बात करें तो यहां की परंपराएं, लोक-कलाएं, भाषा और पहनावे यहां की अलग पहचान बनाता है. बाकी जगह की तरह यहां पर भी ज्यादा महिलाएं साड़ी ही पहनती हैं, लेकिन इस वियर करने और फैब्रिक में थोड़ा अंतर होता है. जो दूसरे से यहां के पहनावे को अलग बनाता है. यहां ज्यादातर सीधी आंचल वाली साड़ी शहरी क्षेत्रों में पहनी जाती है.
बिहार का पहनावे में किस फैब्रिक की साड़ी ज्यादा पहनी जाती है. यहां की टसर सिल्क साड़ी काफी प्रसिद्ध है. यह थोड़ी महंगी जरूर होती है. लेकिन सभी द्वारा पसंद की जाती है. ऐसे ही बिहार के दूसरे कई फैब्रिक और प्रिंट हैं जिनमें साड़ी से लेकर सूट बनाए जाते हैं. आइए जानते हैं इसके बारे में
भागलपुरी सिल्क साड़ी
भागलपुरी साड़ी, जिसे भागलपुरी सिल्क के नाम से भी जाना जाता है, यह महिलाओं का सबसे पसंदीदा पहनावा है. यह रेशम के धागों से तैयार की जाती है. जो काफी चमकदार और हल्की होती है. दूसरी तरफ टसर साड़ी को नेचुरल रेशम से बनाया जाता है. ज्यादातर लोग खास अवसर, शादी या त्योहार पर इसे पहना जाता है. बिहार के ग्रामीण इलाकों में रहने वाली महिलाएं रोजाना के उपयोग में सूती साड़ियां पहनती हैं, जिनमें हल्की रंग और फूलों का डिजाइन बना होता है. इसके अलावा शहरों में आधुनिक डिजाइन और सिंथेटिक साड़ियां भी काफी पसंद की जाती है. साड़ी को पहनने का तरीका जगह के मुताबिक बदलता है. कहीं सीधा पल्लू प्रचलित है तो कहीं उल्टा पल्लू में साड़ी पहनने का चलन है.
मिथिला प्रिंट
मिथिला प्रिंट बिहार के मिथिला क्षेत्र की पहचान है. यह न सिर्फ दीवारों और कागज तक सीमित नहीं है, बल्कि सूट और साड़ी पर बी देखने को मिलती है. आजकल बिहार के युवाओं के बीच में मिथिला प्रिंट वाले कुर्ते, साड़ियां, दुपट्टे, टी-शर्ट और स्कार्फ बहुत ज्यादा लोकप्रिय हो रहे हैं.
कॉटन की साड़ी
बिहार में कॉटन साड़ियां बहुत ही पहनी जाती है, जो बहुत ही कंफर्टेबल होती है और गर्मी में पसीने का आसानी से सोख लेती है, खासकर के य पटना, गया, और नालंदा क्षेत्रों में बनती हैं. इस साड़ियों पर हैंडलूम बुनाई की जाती है. इसके अलावा पारंपरिक डिजाइन के साथ-साथ आधुनिक पैटर्न के डिजाइन भी इसपर डाले जाते हैं. कुछ पर हल्की कढ़ाई या ब्लॉक प्रिंट भी किया जाता है. इस तरह की कॉटन साड़ी महिलाएं रोजाना पहनती हैं.
मनिहारी साड़ी
मनिहारी साड़ी बिहार के पूर्णिया जिले में प्रसिद्ध है. यह साड़ी स्थानीय कारीगरों द्वारा बुनी जाती है और इनमें बिहार के लोक संस्कृति की झलक देखने को मिलती है. इन पर हल्की कढ़ाई, बूटे और रंगी बॉर्डर बनाए जाते हैं, जो इसे अट्रैक्टिव बनाने में मदद करते हैं. यह साड़ी आमतौर पर सूती कपड़े से बनाई जाती है और यह रोजमर्रा के पहनावे का हिस्सा है. आजकल इन साड़ियों में भी आधुनिक डिजाइन देखे जाने लगे हैं.
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मधुबनी प्रिंट
मधुबनी प्रिंट को नेचुरल कलर का उपयोग कर पारंपरिक डिजाइन जैसे कि मछली, सूर्य, पेड़, पक्षी और देवी-देवताओं का चित्र बनाया जाता है. इससे न सिर्फ स्थानीय कला को बढ़ावा मिलता है और अब ये फैशन का भी हिस्सा बन चुका है जिसमें बिहार की संस्कृति की झलक देखने को मिलती है. मधुबनी प्रिंट में आपको साड़ी, सूट और दुपट्टे मिल जाएंगे.
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