बच्चों की खांसी और आयुर्वेदImage Credit source: Getty Images
बदलते मौसम में बच्चों की इम्यूनिटी यानी शरीर की सुरक्षा शक्ति जल्दी कमजोर हो सकती है. तापमान में अचानक ठंड बढ़ना, हवा में नमी का बदलना और धूल मिट्टी का ज्यादा होने से बच्चों में खांसी का खतरा बढ़ जाता है. स्कूल में बच्चों का आपस में मिलना-जुलना, भीड़ वाली जगहों पर जाना और सर्दी-खांसी वाले बच्चों के पास रहना भी संक्रमण को तेजी से फैलाने का कारण बनता है. इस मौसम में गले की नलियों में सूजन और चिपचिपा बलगम जमा हो सकता है, जिससे बच्चा बार-बार खांसता है. जिन बच्चों को एलर्जी या बार-बार सर्दी की परेशानी रहती है, उनके लिए यह मौसम और ज्यादा परेशानी पैदा कर देता है.
खांसी को साधारण समझकर अनदेखा कर देना ठीक नहीं है. लगातार खांसी बढ़ने पर गले में जलन और दर्द बढ़ जाता है. संक्रमण नीचे जाकर सीने तक पहुंच सकता है और बच्चे को सांस लेने में दिक्कत, नींद में रुकावट, थकान और कमजोरी हो सकती है. लंबे समय तक खांसी रहने से भूख भी कम हो जाती है, जिससे बच्चा खाना आधा छोड़ देता है और शरीर को उचित एनर्जी नहीं मिल पाती. कई बार खांसी के साथ नाक बंद, कान में दर्द, साइनस की परेशानी, बुखार और गले में बहुत ज्यादा सूजन जैसी दिक्कतें भी बढ़ सकती हैं. समय पर ध्यान न देने से यह स्थिति गंभीर बन सकती है.
खांसी में आयुर्वेद है असरदार
दिल्ली सरकार में आयुर्वेद के डॉ. आर.पी. पराशर बताते हैं कि बच्चों की खांसी में शरीर का संतुलन, गर्माहट और गले की नलियों को आराम देना आवश्यक माना जाता है. इस समय तुलसी के पत्तों का हल्का उबाला हुआ पानी, शहद में थोड़ी सी हल्दी मिलाकर देना और अदरक का बहुत हल्का रस गले को आराम देने में सहायक माना गया है. यह चीजें बलगम को पतला करके बाहर निकालने में भी मदद कर सकती हैं.
बच्चों को बहुत ठंडी चीजें, बर्फ, फ्रिज का पानी और तला-भुना भोजन इस समय नहीं देना चाहिए, क्योंकि इससे सर्दी और खांसी बढ़ सकती है. हल्का गर्म पानी, सादा खाना, दाल-चावल, घर का गर्म सूप और मौसमी फल पाचन को आसान रखते हैं और शरीर जल्दी ठीक होता है. रात को बच्चे की छाती या पीठ पर अजवाइन मिलाकर सरसों का तेल हल्का गर्म करके लगाना आराम देता है. अगर 3-4 दिन में खांसी कम न हो, बच्चा बेचैन लगे या सांस में कठिनाई दिखे तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है.
ये भी जरूरी
बच्चों को ठंडी हवा से बचाएं.
कमरे का तापमान बहुत ज्यादा बदलने न दें.
बहुत ठंडी चीजें और ठंडा पानी कम कराएं.
धूल-धुआं वाले माहौल से बच्चों को दूर रखें.

