चीन की नई रणनीति का खुलासा!
लद्दाख की बर्फीली पहाड़ियों में ठंड बढ़ने के साथ ही चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) भी नई और चुपचाप तैयारी में जुट गई है. ताजा सैटेलाइट तस्वीरों ने चीन की एक नई बंकर रणनीति का खुलासा किया है, जिसके तहत वह भारत की सीमा (LAC) के करीब तिब्बत में अपने एयर डिफेंस सिस्टम के लिए कंक्रीट के मजबूत, भूमिगत ठिकाने बना रहा है. जहां से वो जरूरत पड़ने पर मिसाइलें दाग सकता है.
अमेरिकी सैटेलाइट कंपनी Maxar Technologies की हालिया तस्वीरों में इस बात का खुलासा हुआ है. तस्वीरों में साफ दिखाई दे रहा कि चीन ने पैंगोंग झील के पास लगभग 10 हेक्टेयर इलाके में नए ठिकानों का निर्माण शुरू कर दिया है. यह लगभग वही इलाका है, जहां 2020 में गलवान के पास भारत चीन के जवानों के बीच हिंसक झड़प हुई थी.
चीन इन ठिकानों में Surface-to-Air Missiles (SAM) यानी सतह से हवा में मार करने वाली HQ-9B मिसाइलें रखी जा सकती हैं. इन मिसाइल साइटों की सबसे खास बात है उनकी स्लाइडिंग कंक्रीट छतें, जो सामान्य समय में मिसाइलों को पूरी तरह छिपाकर रखेंगी और सिर्फ लॉन्चिंग के वक्त खुलेंगी. इस तरह की संरचनाएं PLA को मामला बिगड़ने पर टिकाऊ रक्षा और लॉजिस्टिक-सपोर्ट देगी.
क्या है चीन की तैयारी का मकसद?
चीन की यह तैयारी भारत की तेज़ी से बढ़ती ड्रोन और लॉयटरिंग म्यूनिशन (घूमकर वार करने वाली ड्रोन मिसाइल) क्षमता से डर के चलते हो रही है. दरअसल, भारत ने ऑपरेशन सिंदूर (मई 2025) के दौरान पाकिस्तान पर ड्रोन आधारित हमलों में अभूतपूर्व सफलता हासिल की थी. इस ऑपरेशन में इजरायली Harop ड्रोन और स्वदेशी नागास्त्र-1 जैसे सिस्टम ने पाकिस्तान के कई रडार, एयर डिफेंस यूनिट और मिसाइल साइटें तबाह कर दी थीं.
इस अनुभव से सबक लेते हुए चीन अब अपने SAM सिस्टम को हार्डन (सुरक्षित और स्थायी) बना रहा है. सैटेलाइट तस्वीरों में सिर्फ पैंगोंग ही नहीं, बल्कि होटन बेस (अक्साई चिन के पास) और शिगात्से एयरबेस पर भी ऐसे ही ठिकाने दिखे हैं, जहां चीन अपने S-400 एयर डिफेंस सिस्टम को रख रहा है.
ये ठिकाने PLA को संभावित ड्रोन या मिसाइल हमलों से सुरक्षा देंगे, लेकिन साथ ही यह भी दिखाते हैं कि चीन अब खुली मोबाइल यूनिट्स की जगह स्थायी रक्षात्मक ढांचे पर निर्भर होता जा रहा है.
तकनीक, तैनाती और रणनीति तीनों स्तर पर भारत की तैयारी
भारत भी चीन की इस बंकर रणनीति का सटीक और लचीला जवाब तैयार कर रहा है.
1- ड्रोन और लॉयटरिंग म्यूनिशन शक्ति-DRDO का नागास्त्र, इसके साथ ही 1 तोपखाना रेजिमेंट में शामिल किया जा रहा है. इसका वजन 9 किलो, रेंज: 15 किमी और वारहेड1 किलो है. यह दुश्मन के रडार या मिसाइल साइट पर कामीकाज़े अंदाज़ में खुद टकराकर उसे नष्ट कर देता है.
भारतीय स्टार्टअपSolar Defence और IdeaForge ऐसे ड्रोन स्वार्म बना रहे हैं, जो झुंड में उड़कर सामूहिक हमले कर सकते हैं यानी चीन के बंकर अब सुरक्षित नहीं रहेंगे. वायुसेना 2026 तक 800 Smart Unmanned Munition Systems (SUMS) सीमाओं पर तैनात करने जा रही है.
2- निगरानी और लक्ष्य पहचान (ISR Capability)
- भारत के RISAT-2BR1 Synthetic Aperture Radar सैटेलाइट चीन की गतिविधियों पर 24×7 नज़र रख रहे हैं बादलों या रात में भी ये काम किया जा रहा है.
- LAC पर UAV surveillance grid तैयार है, जिसमें Heron Mk-2 और Tapas-BH201 जैसे स्वदेशी ड्रोन सक्रिय हैं.
3- एंटी-ड्रोन और एयर डिफेंस सिस्टम
- भारतीय सेना ने आकाशतीर कमांड सिस्टम और SkyDew रडार से एक एकीकृत एयर-डिफेंस नेटवर्क तैयार किया है.
- सितंबर 2025 के अभ्यास में सेना ने इस सिस्टम से 15 से ज्यादा चीनी ड्रोन गिराने का दावा किया था.
- DRDO भी लेजर-आधारित Directed Energy Weapons (DEW) विकसित कर रहा है जो छोटे ड्रोन को हवा में ही जला सकता है.
4- LAC पर तैनाती और इन्फ्रास्ट्रक्चर
- भारत ने Eastern Ladakh, Sikkim और Arunachal में कई Advanced Landing Grounds (ALGs) को अपग्रेड किया है, जो LAC पर भारत की तैयारी को मजबूत करती है.
- Rafale, Su-30MKI और Mirage-2000 फाइटर अब LAC के नजदीकी बेसों हासीमारा, लेह, तेजपुर पर तैनात हैं.
- BRO ने सीमावर्ती सड़कों और सुरंगों का तेजी से विस्तार किया है ताकि ड्रोन और मिसाइल यूनिट्स को जल्द आगे भेजा जा सके.
भविष्य की रणनीति …हाइब्रिड काउंटर स्ट्रेटेजी
भारत की नई रणनीति स्थायी ठिकानों और मोबाइल सिस्टम दोनों का मिश्रण है. अगर चीन के बंकर मिसाइलें बचा भी लें, तो भारत ड्रोन स्वार्म और सटीक आर्टिलरी स्ट्राइक से उन्हें ब्लाइंड यानी निष्क्रिय करने की योजना पर काम कर रहा है.
चीन की नई मिसाइल बंकर रणनीति उसकी कमजोरी और डर दोनों का संकेत है. जहां चीन अब भारी किलेबंद ढांचों पर भरोसा कर रहा है, वहीं भारत का जवाब लचीलापन और सटीक वार पर आधारित है.
