एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ताइवान को एक अहम तकनीकी साझेदार के रूप में देखता है, खासकर सेमीकंडक्टर और चिप मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में. इस सहयोग से भारत को आर्थिक विकास, तकनीकी प्रगति और रणनीतिक आत्मनिर्भरता का मजबूत रास्ता मिल सकता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि ताइवान दुनिया के प्रमुख चिप निर्माताओं में शामिल है. ऐसे में भारत के लिए यह साझेदारी बेहद निर्णायक साबित हो सकती है.
सेमीकंडक्टर में भारत-ताइवान साझेदारी को बताया गया अहम
Taipei Times में प्रकाशित लेख के अनुसार, भारत सरकार पिछले कई वर्षों से ताइवान की बड़ी कंपनियों को आकर्षित करने की कोशिश कर रही है. हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस दिशा में जागरूकता और भागीदारी को संस्थानों, उद्योगों और नीति निर्माताओं के स्तर पर और बढ़ाने की जरूरत है. ताइवान की चिप मैन्युफैक्चरिंग क्षमता भारत के लिए एक रणनीतिक अवसर मानी जा रही है.
शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट से मजबूत हो सकता है सहयोग
रिपोर्ट में भारत और ताइवान के बीच सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी में संयुक्त मास्टर डिग्री प्रोग्राम को एक सकारात्मक पहल बताया गया है. यह कार्यक्रम चार ताइवानी विश्वविद्यालयों और भारतीय विज्ञान संस्थान के बीच चल रहा है. लेख में कहा गया है कि भारतीय इंजीनियरों और टेक प्रोफेशनल्स को इसमें भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, ताकि जरूरी तकनीकी एक्सपर्ट और अनुभव भारत तक पहुंच सके.
भारत में ताइवान साइंस पार्क बनाने का सुझाव
शिक्षा से आगे बढ़ते हुए रिपोर्ट में भारत में एक ताइवान साइंस पार्क स्थापित करने का सुझाव दिया गया है. ऐसा समर्पित केंद्र ताइवानी कंपनियों को आकर्षित कर सकता है और लंबे समय के संरचित सहयोग को बढ़ावा देगा. इसके साथ ही यह भारत की तकनीकी और औद्योगिक क्षमता को ताइवान के साथ मिलकर आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता का प्रतीक भी बनेगा.

