न्यूक्लियर रिएक्टर वो सिस्टम है जिसके जरिए नाभिकीय विखंडन से बिजली पैदा की जाती है.
अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA चांद पर न्यूक्लियर रिएक्टर बनाने जा रही है. इसे अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ एनर्जी के साथ मिलकर बनाया जाएगा. नासा का यह प्रोजेक्ट आर्टेमिस कार्यक्रम के तहत लंबे मिशनों और मंगल ग्रह की भविष्य की यात्राओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है. इसके लिए नासा और डिपार्टमेंट ऑफ एनर्जी मिलकर काम करेंगे. इस प्रोजेक्ट के तहत न्यूक्लियर रिएक्टर के जरिए बिजली बनाई जाएगी.
दावा किया गया है कि 2030 तक इस प्रोजेक्ट को पूरा कर लिया जाएगा. यह सिस्टम सालों तक सुरक्षित और स्थिर ऊर्जा प्रदान करेगा. बार-बार नए ईधन के लिए कवायद नहीं करनी होगी. नासा के एडमिनिस्ट्रेटर जेरेड आइज़ैकमान का कहना है कि यह स्पेस की दुनिया में स्वर्ण युग की शुरुआत होगी.
क्या होता है न्यूक्लियर रिएक्टर?
न्यूक्लियर रिएक्टर वो सिस्टम है जिसके जरिए नाभिकीय विखंडन से बिजली पैदा की जाती है. ईधन के रूप में जब यूरेनियम-235 या प्लूटोनियम-239 का नाभिक टूटता है तो बहुत ऊष्मा (Heat) निकलती है. इससे टर्बाइन को घुमाया जाता है और बिजली का निर्माण होता है. इस तरह चांद पर लगने वाला न्यूक्लियर रिएक्टर स्पेस की दुनिया में में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा. कई तरह के प्रयोग आसानी से किए जा सकेंगे. बिजली की कमी की बाध्यता खत्म होगी.
न्यूक्लियर रिएक्टर.
चांद को न्यूक्लियर पावर की जरूरत क्यों?
चांद पर रातें लम्बी होती हैं जो करीब दो हफ्तों तक चलती हैं. सोलर पैनल इतनी बिजली नहीं बना सकते. यहां पर सोलर एनर्जी के लिए सूर्य की रोशनी नहीं होती. न्यूक्लियर रिएक्टर के जरिए लगातार बिजली सप्लाई की जा सकेगी. भले ही समय या मौसम कोई भी हो.
हाल के कुछ अभियानों में रेडियोआइसोटॉप पावर का इस्तेमाल किया गया है, लेकिन नया सिस्टम बड़ा और मजबूत होगा. नए प्लान के जरिए 40 किलोवॉट तक बिजली का निर्माण किया जा सकेगा. यह इतनी बिजली है कि धरती पर 30 घर रोशन किए जा सकते हैं.
इस रिएक्टर को चंद्रमा के कठोर वातावरण में कम से कम 10 वर्षों तक टिके रहना होगा. खास बात है कि चांद पर बनने वाला न्यूक्लियर रिएक्टर हल्का, सुरक्षित और रोबोट या अंतरिक्ष यात्रियों द्वारा आसानी से स्थापित किया जा सकेगा.

कैसे दिखेगा असर?
इस प्रोजेक्ट के सफल होने पर चांद पर लगातार बिजली की सप्लाई हो सकेगी. मंगल मिशन के लिए टेस्टिंग आसान हो सकेगी. यह न्यूक्लियर पावर बिजली पहुंचाने में लगने वाले समय को कम कर देगा. यह प्रोजेक्ट अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस मिशन के लिए भी ऐतिहासिक उपलब्धि की तरह होगा जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका को स्पेस की दुनिया में सबसे आगे रखना है.
चांद.
कितने फायदे?
न्यूक्लियर रिएक्टर के जरिए थोड़े से यूरेनियम से लाखों यूनिट बिजली बनाई जा सकती है. विशेषज्ञ इसे कोयल-तेल से कहीं ज्यादा पावरफुल बताते हैं. कार्बन प्रदूषण बहुत कम होता है. न्यूक्लियर रिएक्टर से कार्बन डाई ऑक्साइड नहीं निकलती, यही वजह है कि यह जलवायु परिवर्तन से लड़ने में मददगार साबित होता है. लगातार बिजली देता है और सोलर विंड की तरह मौसम पर निर्भरता खत्म करता है.
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