साड़ी पहनकर बैठा था ठग
रात के करीब 10 बजे का वक्त था. मोहल्ले में सन्नाटा पसरा था. तभी कुछ पुलिसकर्मियों ने एक घर के दरवाजे पर दस्तक दी. पुलिस ने आवाज लगाई… दरवाजा खोलिए, अभिषेक कहां है? अंदर से एक महिला ने जवाब दिया, यहां कोई अभिषेक नहीं रहता, बस राजू और उसकी बीवी हैं. पुलिस ये सुनकर हैरान रह गई, क्योंकि उन्हें पुख्ता इनपुट मिला था कि ठग अभिषेक अपने घर में ही छिपा है.
पुलिस ने रात भर घर पर निगरानी रखी. दरवाजा नहीं खुला. सुबह होते ही स्थानीय पुलिस को बुलाया गया. दबाव बढ़ा तो आखिरकार सुबह 6 बजे दरवाजा खुला. घर में एक महिला फर्श पर बैठी थी. लाल साड़ी, घूंघट और हाथों में चूड़ियां. एक सिपाही ने पूछा, अभिषेक कहां है? घर की दूसरी महिला बोली, यह राजू की बीवी है, अंदर कोई पुरुष नहीं.
ठग ने पहन रखी थी साड़ी
लेकिन पुलिस की नजरों को धोखा देना आसान नहीं था. एक अफसर ने धीरे से कहा, घूंघट उठाइए महिला झिझकी. जैसे ही पुलिस ने घूंघट हटाया, सन्नाटा छा गया. वो कोई महिला नहीं, बल्कि अभिषेक ही था, जिसने गिरफ्तारी से बचने के लिए साड़ी पहन रखी थी.
बंगाल साइबर ब्रांच की टीम आसनसोल से शाहजहांपुर पहुंची थी. आरोप था कि अभिषेक नाम का युवक 3.86 करोड़ रुपये की साइबर ठगी में शामिल है. बंगाल के सेवानिवृत्त चीफ इंजीनियर अमल मन्ना से जून में एक गिरोह ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर तीन दिन तक धमकाकर पैसे वसूल लिए थे. इस ठगी का मास्टरमाइंड अभिषेक था. जांच में मोबाइल लोकेशन शाहजहांपुर के इसी घर तक पहुंची.
क्या बोले पुलिस अधिकारी?
पुलिस अधिकारी दीपांकर देवनाथ ने बताया, यह वही आरोपी है जिसने अमल मन्ना से 3.86 करोड़ रुपये ठगे थे. तीन दिन से टीम उसकी तलाश में थी. रात में दबिश दी तो उसने महिला बनकर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की. पुलिस उसे अपने साथ बंगाल ले गई.
पुलिस अब उसके नेटवर्क की जांच कर रही है, ताकि ठगी में शामिल बाकी लोगों को पकड़ा जा सके. शाहजहांपुर के लोग अब भी हैरान हैं कि कैसे एक शातिर ठग ने खुद को बचाने के लिए साड़ी और घूंघट का सहारा लिया.
