डायबिटीज की सर्जरीImage Credit source: Getty Images
आज तक डायबिटीज की बीमारी का कोई पक्का इलाज नहीं था. यह एक बार हो जाए तो इसे सिर्फ दवाओं, डाइट और लाइफस्टाइल से ही कंट्रोल किया जा सकता है. लेकिन अब एम्स के सर्जरी विभाग के डॉ. मंजूनाथ ने दावा किया है कि एक खास प्रक्रिया यानी मेटाबॉलिक सर्जरी से डायबिटीज को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है और कई मामलों में यह बीमारी लगभग खत्म भी हो सकती है. यह सर्जरी शरीर की मेटाबॉलिज़्म प्रक्रिया में बदलाव लाकर इंसुलिन की सेंस्टिविटी बढ़ाती है, जिससे ब्लड शुगर प्राकृतिक रूप से कम होने लगता है.
हालांकि बड़ा सवाल यह है कि क्या हर डायबिटीज का मरीज यह सर्जरी करवा सकता है? आइए समझते हैं कि किन लोगों के लिए यह सर्जरी सुरक्षित और कारगर है और इसका पूरा प्रोसेस कैसे काम करता है.
क्या हर मरीज करा सकता है सर्जरी?
एम्स के सर्जरी विभाग के डॉ. मंजूनाथ बताते हैं कि मेटाबॉलिक सर्जरी हर डायबिटीज मरीज के लिए नहीं है. यह सर्जरी केवल टाइप-2 डायबिटीज वाले और अनकंट्रोल्ड शुगर वाले मरीजों के लिए ही फायदेमंद होती है, खासतौर पर उनके लिए जिनपर दवाओं और इंसुलिन का असर कम हो रहा है. जिन लोगों का वजन बहुत ज्यादा है या बीएमआई हाई है, वे इस प्रक्रिया के बेहतर उम्मीदवार माने जाते हैं, क्योंकि मोटापा और डायबिटीज एक-दूसरे से जुड़े होते हैं.
डॉ. मंजूनाथ ने बताया कि टाइप-1 डायबिटीज वाले मरीज इस सर्जरी से लाभ नहीं उठा सकते, क्योंकि उनकी बीमारी की वजह अलग होती है और इंसुलिन बनना ही बंद हो जाता है. इसके अलावा सभी मरीजों को मेडिकल हिस्ट्री, हार्ट-किडनी की स्थिति, उम्र और अन्य जोखिमों के आधार पर जांच किया जाता है. डॉक्टर तय करते हैं कि सर्जरी उनके शरीर के लिए सुरक्षित और सफल हो सकती है या नहीं.
क्या है सर्जरी की प्रक्रिया?
मेटाबॉलिक सर्जरी का प्रोसेस बैरियाट्रिक तकनीक जैसा होता है, जिसमें पेट और आंतों के स्ट्रक्चर में बदलाव किया जाता है. आमतौर पर पेट को छोटा किया जाता है और भोजन के रास्ते को आंत के दूसरे हिस्से से जोड़ दिया जाता है. इससे खाना तेजी से पचता है और शरीर में इंसुलिन की सेंस्टिविटी बढ़ जाती है.
ऐसे में ब्लड शुगर लेवल प्राकृतिक रूप से कंट्रोल होने लगता है. यह लैप्रोस्कोपिक प्रक्रिया होती है यानी छोटे-छोटे चीरे लगाकर की जाती है, जिससे रिकवरी जल्दी होती है. सर्जरी से पहले मरीज की पूरी हेल्थ स्क्रीनिंग की जाती है और सर्जरी के बाद खानपान और लाइफस्टाइल में बदलाव जरूरी होता है.
कितना होना चाहिए शुगर लेवल?
अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन ने डायबिटीज पहचानने के लिए कई मानक तय किए हैं. इसमें HBA1C, फास्टिंग शुगर और खाने के बाद का शुगर लेवल शामिल है. आइए जानते हैं.
HBA1C: 5.7% तक नॉर्मल, 5.7%6.4% प्रीडायबिटीज, 6.5% या अधिक डायबिटीज.
फास्टिंग ग्लूकोज: 100 mg/dL से कम नॉर्मल, 100125 mg/dL प्रीडायबिटीज, 126 mg/dL या अधिक डायबिटीज.
पोस्ट-मी़ल शुगर: 140 mg/dL से कम नॉर्मल, 140199 mg/dL प्रीडायबिटीज, 200 mg/dL या अधिक डायबिटीज का संकेत.
इन तीनों टेस्ट से पता चलता है कि आपका शुगर लेवल किस रेंज में है और आपको डायबिटीज है या नहीं.

