कोहरे के कारण दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-आगरा एक्सप्रेसवे पर गाड़ियों की भिड़ंत से एक दर्जन से अधिक मौते हुईं.
कोहरा कहर ढा रहा है. मौतों की वजह बन रहा है. कोहरे के कारण दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर 30 गाड़ियां भिड़ गईं. वहीं, दिल्ली-आगरा एक्सप्रेसवे पर कई बसें और कारें आपस में भिड़ने में 13 मौते हुईं. 25 से ज्यादा लोग घायल हो गए. कोहरे की शुरुआत शाम से होती है लेकिन सुबह के समय यह तेजी से बढ़ता है. अब सवाल है कि कोहरा सुबह-सुबह इतनी तेजी से क्यों बढ़ जाता है कि दिखना मुश्किल हो जाता है.
सबसे पहले यह जान लेते हैं कि कोहरा क्यों पड़ता है. सर्दियों के मौसम में तापमान तेजी से गिरता है. रात में जमीन तेजी से ठंडी होती है. हवा ठंडी होने लगती है. इस मौसम में जलवाष्प ऊपर उठती है और हवा के सम्पर्क में आती है. इस दौरान ये भारी होकर बारीक सी बूंदों के रूप में जमने लगती है. जैसे-जैसे सर्दी बढ़ती है वैसे-वैसे ये धुएं के रूप में बदलने बदलने लगती है. यह घनी होती चली जाती है और धीरे-धीरे दूर तक दिखना बंद हो जाता है. यही कोहरा होता है.
सुबह के समय कोहरा क्यों ज्यादा बनता है?
कोहरा रात के समय बढ़ना शुरू होता है और सुबह 5 से 7 बजे तक बहुत गहरा हो जाता है. एक्सपर्ट कहते हैं, ऐसा तब होता है जब तापमान ओस बिंदु के सबसे करीब पहुंच जाता है. ओस बिंदु को ओसांक भी कहते हैं. यह वो स्थिति होती है जब हवा ठंडी होने पर उसमें मौजूद जलवाष्प पानी की बूंदों में बदलने लगती है. आसान भाषा में समझें तो हवा में कुछ न कुछ नमी होती है और गर्म हवा ज्यादा नमी पकड़ती है. जैसे-जैसे हवा ठंडी हो जाती है वैसे-वैसे उसकी नमी पकड़ने की क्षमता घटती है. नतीजा जिस तापमान पर हवा भारी हो जाती है और नमी-पानी बनाती है वही ओसांक है.
कोहरा न केवल सुबह के समय बनता है, बल्कि आमतौर पर सुबह के समय ही जल्दी छंट भी जाता है. सूरज उगने के बाद, जमीन गर्म होने लगती है और धीरे-धीरे तापमान बढ़ जाता है. जब तापमान ओस बिंदु से ऊपर चला जाता है और कोहरा छंट जाता है.
दिल्ली-आगरा एक्सप्रेसवे पर गाड़ियों की भिड़ंत के बाद वाहनों में आग लग गई. फोटो: PTI
ओस, कोहरा, धुंध और पाले में क्या अंतर है?
ओस: जब रात में तापमान गिरता है तो जमीन और आसपास की जगह ठंडी हो जाती है. ठंडी सतह के सम्पर्क में आने वाली हवा अपनी नमी को रोक नहीं पाती. यह जलवाष्प यानी पानी की बूंदों में बदल जाती है. ये बूंदें जम जाती हैं. घास, फसल, पत्तियों पर ये सुबह के समय नजर आती हैं. धूप निकलने पर ये फिर से भाप बनकर उड़ जाती हैं.
ओस.
कोहरा: सर्दियों के मौसम में तापमान तेजी से गिरता है. रात में जमीन तेजी से ठंडी होती है. हवा ठंडी होने लगती है. इस मौसम में जलवाष्प ऊपर उठती है और हवा के सम्पर्क में आती है. इस दौरान ये भारी होकर बारीक सी बूंदों के रूप में जमने लगती है. जैसे-जैसे सर्दी बढ़ती है वैसे-वैसे ये धुएं के रूप में बदलने बदलने लगती है. यह घनी होती चली जाती है और धीरे-धीरे दूर तक दिखना बंद हो जाता है. यही कोहरा होता है.
धुंध: यह हवा में मौजूद धूल, धुआं और बहुत सूक्ष्म नमी कणों की परत होती है, जिससे आसमान धुंधला दिखता है. इससे दूर की चीजें धुंधली नजर आती हैं. अगर विजिबिलिटी की सीमा एक किलोमीटर या इससे कम हो जाए तो इसे कुहासा या धुंध कहते हैं. वाहनों, फैक्ट्रियों और पराली जलाने से निकलने वाला धुआं, हवा में उड़ती धूल, कणों की हल्की नमी सब मिलकर धुंध बनाते हैं.
प्रयागराज की तस्वीर.
पाला: पाला वो स्थिति जब हवा का तापमान 0°C या उससे नीचे चला जाता है. हवा की नमी या ओस जमकर बर्फ की पतली सी लेयर बना लेती हैं. जब ठंड ज्यादा पड़ती है तो बूंदें लिक्विड के रूप में नहीं रहतीं ये सीधे बर्फ बन जाती हैं. पौधे, घास और जमीन पर बर्फ की पर्त नजर आती है.
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