वेनेजुएला से रिश्तों में तनाव के बीच ट्रम्प ने कोलंबिया के खिलाफ नया मोर्चा खोल दिया है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो और उनके कुछ करीबी सहयोगियों पर कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए हैं. वेनेजुएला से रिश्तों में तनाव के बीच ट्रम्प ने यह नया मोर्चा खोल दिया है.आरोप यह है कि कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो की नीतियों और गतिविधियों ने नारको ट्रैफिक को फलने-फूलने दिया है. इससे संयुक्त राज्य अमेरिका में कोकीन की आपूर्ति में भारी बढ़ोत्तरी हुई है. ट्रम्प की ताजी पहल के बाद दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ गया है. आइए इस नए घटनाक्रम के बहाने जानते हैं कि आखिर कोलंबिया और अमेरिका के संबंधों में इतना तनाव क्यों है?
अतीत में कोलंबिया और अमेरिका का संबंध मुख्यतः ड्रग्स और सुरक्षा सहयोग पर टिका रहा है. साल 2000 के दशक में अमेरिका ने कोलंबिया को बड़े पैमाने पर सैन्य और आर्थिक सहायता दी थी ताकि कोकीन उत्पादन और नार्को-आर्म्ड ग्रुप्स से लड़ाई में मदद मिल सके. इस सहयोग ने दोनों देशों को करीब ला दिया, पर साथ ही कोलंबियाई राजनीति व सामाजिक संघर्षों में भी जटिलताएं देखी जाने लगीं. समय के साथ कोलंबिया की आंतरिक चुनौतियां, मसलन कई वर्षों से चल रहे हिंसक संघर्ष, भूमिहीनता, गरीबी और वैकल्पिक आय के अभाव में किसानों द्वारा कोका की खेती आदि ने यह दिखाया कि केवल सैन्य-उपाय लंबी अवधि का समाधान नहीं हो सकते.
पेट्रो का उदय और नीतिगत बदलाव
एक लीडर के रूप में गुस्तावो पेट्रो पहले लेफ्ट झुकाव वाले राजनीतिक नेतृत्व के रूप में उभरे. उन्होंने टोटल पीस जैसी नीतियां अपनाकर कई संघर्षरत समूहों से वार्ता की कोशिश की. उन्होंने सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाते हुए कुछ इलाकों में हिंसा कम करने का भी प्रयास किया. पर इन कोशिशों पर भी आलोचना हुई. इस वजह से कुछ मामलों में असल नियंत्रण कमजोर पड़ा और कोका की खेती तथा कोकीन उत्पादन में भारी वृद्धि हुई. पेट्रो ने अमेरिका के कुछ विदेश नीतिगत निर्णयों, विशेषकर इज़राइल-फिलिस्तीन मुद्दे पर सार्वजनिक विरोध भी किया. इस वजह से दोनों देशों के संबंधों में दरार आई.
अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप और कोलंबियाई राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो.
नाव-हमलों, नारको-प्रवासन और प्रतिबंध
हाल के महीनों में अमेरिका ने कैरिबियन और अन्य मार्गों पर कथित ड्रग-वाहक नौकाओं पर सैन्य हमले किए. जिनमें कुछ घटनाओं में कोलंबियाई नागरिकों की मृत्यु की खबरें भी आईं. पेट्रो ने इन हमलों की निंदा की और उन्हें हत्या बताया, जिससे कूटनीतिक टकराव और बढ़ गया. अमेरिकी पक्ष का तर्क है कि कोलंबिया की नीतियां अव्यवहारिक रहीं और नार्को-नेटवर्कों को नियंत्रित करने में पूरी तरह विफल रही. परिणाम स्वरूप कोकीन का उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया. इसके लिए जिम्मेदार मानते हुए ट्रम्प प्रशासन ने पेट्रो और उनके परिवार के सदस्यों पर वित्तीय प्रतिबंध लगाए और कोलंबिया की सर्टिफिकेशन व सहायता पर सवाल उठाए.
आरोप, सुबूत और विवाद
अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि कोलंबिया से निकली कोकीन अक्सर मेक्सिकन कार्टेल के हाथों अमेरिका तक पहुंचती है और पेट्रो की कुछ नीतियां जैसे कुछ समूहों के साथ समझौते और वित्तीय जांचों में कथित गड़बड़ियां आदि ने समस्या को विस्तार दिया. वहीं पेट्रो और उनके समर्थक इन आरोपों का खंडन करते हैं. वे कहते हैं कि उनके प्रशासन ने इतिहास में सबसे अधिक मात्रा में ड्रग जब्त की है. घरेलू राजनीति में पेट्रो के आलोचक भी हैं. उनके परिवार और कुछ सहयोगियों पर पहले से भ्रष्टाचार और आपराधिक मामलों की जांचें चल रही हैं. इस वजह से स्थिति और जटिल हुई.
अमेरिका का दावा है कि कोलंबिया से निकली कोकीन अक्सर मेक्सिकन कार्टेल के हाथों अमेरिका तक पहुंचती है.
रणनीतिक और राजनीतिक आयाम
यह टकराव केवल कानून-व्यवस्था का नहीं है. इसमें बड़े अंतरराष्ट्रीय और राजनीतिक संकेत भी हैं शामिल हैं. इनमें कुछ महत्वपूर्ण ये रहे.
- अमेरिका के लिए दक्षिणी सीमाओं पर ड्रग-आपूर्ति को रोकना एक अंदरूनी सुरक्षा मुद्दा है; इसलिए वह सख्ती दिखाना चाहता है.
- कोलंबिया के लिए सजा और वैकल्पिक नीतियां अपनाने के बीच संतुलन कठिन है. कृषक समुदायों को वैकल्पिक आमदनी देने, भूमि-सुधार और न्याय व्यवस्थाओं में सुधार की आवश्यकता है.
- पेट्रो के वैचारिक झुकाव और विदेशी नीति के रुख ने अमेरिका के साथ परस्पर संदिग्धता बढ़ा दी है. अनेक मीडिया रिपोर्ट्स में यह दिखाया गया है कि पॉलिटिकल रुख ने द्विपक्षीय सहयोग को प्रभावित किया है.
परिणाम और संभावनाएं
संभावित परिणामों में आर्थिक सहायता में कटौती, सैन्य सहयोग में सीमाएँ, और कोलंबिया के वैश्विक वित्तीय और कूटनीतिक संबंधों पर असर शामिल हैं. प्रतिबंधों से दोनों देशों के बीच भरोसा घटेगा और क्षेत्रीय सहयोग में संघर्ष बढ़ सकता है. दीर्घकाल में समाधान के विकल्पों में संयुक्त निगरानी और पारदर्शिता बढ़ाना, कोका-निर्मित समुदायों के लिए वैकल्पिक विकास योजनाएँ, और नीतिगत संवाद का री-स्टार्ट आदि शामिल हैं. इसके लिए दोनों पक्षों में राजनीतिक इच्छा-शक्ति जरूरी होगी.
इस तरह हम पाते हैं कि अमेरिकीकोलंबियाई रिश्तों में यह नया तनाव केवल एक द्विपक्षीय झटका नहीं बल्कि लंबे समय से पनपे हुए सुरक्षा, आर्थिक और राजनैतिक मतभेदों का परिणाम है. दोनों देशों के नीति-निर्माताओं के पास सीमित विकल्प हैं. सख्ती और अलगाव की ओर बढ़ना या संयुक्त नीतियों और पारदर्शिता के माध्यम से समस्या का ठोस दीर्घकालिक समाधान खोजने का रास्ता, इसके अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है.
यहां एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि ट्रम्प प्रशासन ने ड्रग्स तस्करों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की है. नशे से अमेरिका में बड़ी संख्या में युवाओं की मौत हो रही है. वेनेजुएला, कोलम्बिया जैसे कई देश केवल ड्रग्स की वजह से अमेरिका के निशाने पर हैं.
यह भी पढ़ें:वेनेजुएला को कौन देता है हथियार, ये कितने हाईटेक? अमेरिका से जंग लड़ने को तैयार
