राम मंदिर धर्म ध्वजा कार्यक्रम में अयोध्या सांसद अवधेश प्रसाद को न्योता नहीं दिया गया था.
अयोध्या से सांसद अवधेश प्रसाद ने राम मंदिर में धर्म ध्वजा स्थापना कार्यक्रम में नहीं बुलाए जाने पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा है कि रामलला के दरबार में धर्म ध्वजा स्थापना कार्यक्रम में मुझे न बुलाए जाने का कारण मेरा दलित समाज से होना है. तो यह राम की मर्यादा नहीं, किसी ओर की संकीर्ण सोच का परिचय है. राम सबके हैं. मेरी लड़ाई किसी पद या निमंत्रण की नहीं, सम्मान, बराबरी और संविधान की मर्यादा की है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज अयोध्या पहुंचे हुए थे, जहां उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर वैदिक मंत्रोच्चार और ‘जय श्री राम’ के नारों की गूंज के बीच केसरिया ध्वज फहराया. इस अनुष्ठान के साथ ही मंदिर का निर्माण औपचारिक रूप से पूरा हो गया. पीएम मोदी ने राम मंदिर ध्वजारोहण को ‘युगांतकारी’ की संज्ञा देते हुए कहा कि ‘सदियों के जख्म और दर्द भर रहे हैं’ क्योंकि 500 साल पुराना संकल्प आखिरकार राम मंदिर के औपचारिक निर्माण के साथ पूरा हो रहा है.
अवधेश प्रसाद बोले- यह राम की मर्यादा नहीं, संकीर्ण सोच का परिचय
ध्वजारोहण के मौके पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे, लेकिन स्थानीय सांसद को कार्यक्रम में नहीं बुलाए जाने का मामला अब तूल पकड़ लिया है. अवधेश प्रसाद अयोध्या से सांसद हैं, ऐसे में उन्हें उम्मीद थी कि कार्यक्रम में उन्हें बुलाया जाएगा, लेकिन वैसा नहीं हुआ. कार्यक्रम के बाद अब उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए अपनी नाराजगी व्यक्त की.
रामलला के दरबार में धर्म ध्वजा स्थापना कार्यक्रम में मुझे न बुलाए जाने का कारण मेरा दलित समाज से होना है।
तो यह राम की मर्यादा नहीं,
किसी ओर की संकीर्ण सोच का परिचय है।राम सबके हैं।
मेरी लड़ाई किसी पद या निमंत्रण की नहीं, सम्मान, बराबरी और संविधान की मर्यादा की है।#Ayodhya
— Awadhesh Prasad (@Awadheshprasad_) November 25, 2025
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