राहुल गांधी
कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बनारस की अमूल्य कारीगरी, बनारसी साड़ियों और यहां के हुनरमंद बुनकरों की दशा पर चिंता जाहिर की है. उन्होंने हाल ही में जन संसद कार्यक्रम के दौरान बनारस के एम्ब्रॉयडरी कारीगरों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की थी. उन्होंने बताया कि कारीगरों का दर्द वही है जो आज देशभर के छोटे दस्तकारों और हुनरमंदों की कहानी बन चुका है.
राहुल गांधी ने जन संसद’ में बनारस के embroidery कारीगरों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की. इस दौरान उनकी समस्याओं को सुना. कांग्रेस ने अपने सोशल मीडिया पर कारीगरों से मुलाकात का एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें सभी लोग कांग्रेस नेता से अपनी परेशानियां बता रहे हैं. इस दौरान कारीगरों ने उनसे कहा ‘हम भी तो Make in India हैं, लेकिन हमारी कहीं सुनवाई नहीं होती’.राहुल का कहना है कि सबसे ज्यादा दुखद यह है कि जिन कारीगरों के क्षेत्र का प्रतिनिधित्व खुद प्रधानमंत्री करते हैं, वहीं कारीगर सरकारी अनदेखी से सबसे ज्यादा परेशान हैं.
कारीगरों ने बयां किया दर्द
मुलाकात के दौरान कारीगर कहते हैं कि ये सेक्टर अब खत्म हो गया है और सभी लोग बेरोजगार हो गए हैं. उन्होंने कहा कि बताया कि एक समय में ये काम बहुत अच्छा चलता था लेकिन आज ये खत्म हो गया है, जिस के वजह से कई रिक्शा चलाने पर मजबूर है तो कोई दूसरा काम करने पर मजबूर है. कारीगर कहता है कि हालात बेहद खराब हो गए हैं और सभी लोग बेहद परेशान हैं. उसने बताया कि इस काम में लाखों लोग जुड़े हुए हैं जिसमें कुछ महिलाएं भी शामिल हैं.
‘परंपरागत काम छोड़ने को मजबूर कारीगर’
सोशल मीडिया पोस्ट में राहुल ने बताया कि कारीगर अपना परंपरागत काम छोड़ने को मजबूर हो चुके हैं. बड़ी संख्या में लोग मजदूरी, रिक्शा चलाने और दिहाड़ी पर निर्भर हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि बनारस की साड़ियों के धागों में हिंदुस्तान की आत्मा बसती है, लेकिन आज इन्हीं धागों को बुनने वाले कारीगर उपेक्षा और बेरोजगारी का सामना कर रहे हैं. राहुल ने बताया ‘कल मैंने संसद में बनारसी साड़ियों की खूबसूरती, उसकी संस्कृति और इतिहास के बारे में बात की – उनके धागों में ही हिन्दुस्तान की आत्मा गुथी हुई है!’.
नेता विपक्ष श्री @RahulGandhi ने ‘जन संसद’ में बनारस के embroidery कारीगरों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की और उनकी समस्याओं को सुना।
प्रधानमंत्री मोदी खुद वाराणसी से सांसद हैं, लेकिन सरकारी उपेक्षा के शिकार ये कारीगर अपना परम्परागत काम छोड़कर मजदूरी करने, रिक्शा चलाने के लिए pic.twitter.com/ZrRzcwr7KP
— Congress (@INCIndia) December 10, 2025
‘त्योहारों और हमारे उत्सवों की पहचान’
इसके आगे उन्होंने कहा ‘बनारसी silk साड़ियां और बनारसी embroidery – नाम लेते ही भारत की समृद्ध कला आंखों में उतर आती है. सदियों से चली आ रही यह परंपरा केवल कपड़ा नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता, हमारे त्योहारों और हमारे उत्सवों की पहचान है’. राहुल ने कहा कि उनका दर्द वही है जो भारत के करोड़ों छोटे कारीगरों, दस्तकारों और हुनरमंदों की आज की दास्तान है. उन्होंने कहा कि उनकी ये शिकायत वाजिब है और खास कर तब जब उनके सांसद खुद प्रधानमंत्री मोदी हैं’.
‘बेरोजगारी बनारस की सबसे कड़वी सच्चाई’
उन्होंने कहा कि सरकारी उपेक्षा के शिकार ये कारीगर अपना परंपरागत काम छोड़ कर मजदूरी करने, रिक्शा चलाने के लिए मजबूर हैं. उन्होंने यह भी बताया कि बेरोजगारी बनारस की सबसे कड़वी सच्चाई बन चुकी है. खासकर युवाओं के लिए रोजगार के सारे अवसर खत्म हो गए हैं. मज़बूरी में वो अपने शहर, अपना घर छोड़कर दूसरे राज्यों और शहरों में काम की तलाश में भटक रहे हैं.
कांग्रेस नेता ने कहा कि एक समय देश भर में ही नहीं, विदेशों में भी जिनके हुनर का बोलबाला था – जो कलाकारी export quality की होती थी आज उनकी मशीनें धूल फांक रही हैं. मशीनें तो छोड़िए, उनकी सुइयां तक चीन और जापान से आती हैं , उन्होंने सवाल किया कि कहां है “Make in India”?.
‘सड़क से संसद तक उनकी आवाज़ उठाएंगे’
राहुल गांधी ने कहा कि सरकार कुछ चंद पूंजीपतियों को बढ़ावा देकर बाज़ार पर उनका ही एकाधिकार तैयार कर रही है और छोटे कारीगरों का व्यापार, उनका अस्तित्व, दोनों खतरे में डाल रही है. उन्होंने कहा कि बार-बार कहा है – भारत को रोजगार और सम्मानजनक आजीविका देने के लिए “democratic model of production” ज़रूरी है. अगर यह मॉडल टूट गया, तो भारत के करोड़ों हुनरमंदों की ज़िंदगी के साथ-साथ हिंदुस्तान की अर्थव्यवस्था भी बर्बाद होगी. उन्होंने कहा कि वो सड़क से संसद तक उनकी आवाज़ उठाता रहेंगे क्योंकि भारत का भविष्य उसके हुनरमंद और मेहनतकश लोगों से ही जुड़ा हुआ है.

