वरासत प्रकरण का तीन दिन में हुआ निपटारा
सरकारी कार्यशैली किस तरह की होती है इस पर चर्चा करना भी शायद अब बेमानी होगा क्योंकि सरकारी कर्मचारी अपनी जिम्मेदारियों से पूरी तरह विमुख हो चुके हैं. इन सबके बीच कुछ ऐसे मामले देखने को मिल जाते हैं जो अपने आप में निराले होते है. ऐसे मामले सोचने को मजबूर कर देते है कि आखिर सरकारी कर्मचारी आम जनता के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को कब समझेंगे.
इसी क्रम में एक अनूठा उदाहरण कानपुर के ग्राम मढ़ीलवा निवासी संतोष कुमार उत्तम के मामले में देखने को मिला. आवेदक ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी जमीन पर मृतक रामशंकर का नाम अब तक दर्ज है, जबकि उनकी मृत्यु 21 अक्टूबर 2017 को हो चुकी थी. आठ वर्षों से लंबित इस वरासत प्रकरण के निस्तारण के लिए संतोष कुमार सरकारी दफ्तरों की चौखट सैकड़ों बार घिस चुके थे. जब इसके बाद भी कोई समाधान नहीं निकला तो उन्होंने जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह से पूरे मामले की शिकायत की. डीएम ने संबंधित अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए.
तीन दिन में निपटा मामला
जिलाधिकारी के आदेश मिलते ही चकबंदी अधिकारी ने तत्काल जांच प्रारंभ की और सभी अभिलेख सत्यापन के बाद मात्र तीन दिनों में, वरासत दर्ज कर दी. इस प्रकार आठ वर्ष पुराना मामला मात्र तीन दिन में निपटा दिया गया. संतोष कुमार उत्तम ने प्रशासन की इस तत्परता पर गहरी संतुष्टि व्यक्त करते हुए कहा कि ‘मैंने सोचा नहीं था कि इतने पुराने केस का इतनी जल्दी समाधान मिल जाएगा.’
8 साल बाद मिला समाधान
जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने इस उपलब्धि को टीमवर्क का परिणाम बताया. उन्होंने कहा कि शासन की प्राथमिकता जनसुनवाई प्रणाली को प्रभावी बनाना और जनता का भरोसा प्रशासन पर मजबूत करना है. उन्होंने अधिकारियों से अपेक्षा की कि हर समाधान दिवस पर कम से कम कुछ लंबे समय से रुके केसों को प्राथमिकता दी जाए ताकि आमजन को यह महसूस हो कि प्रशासन वास्तव में उनके साथ खड़ा है. संतोष कुमार उत्तम को तो उनकी समस्या का समाधान आठ साल बाद मिल गया. ऐसे हजारों संतोष कुमार हैं जो सरकारी कार्यशैली के मकड़ी तंत्र में आज भी किसी ना किसी समस्या को लेकर उलझे हुए है.
