Hamanuru Shivashankarappa
कर्नाटक के वरिष्ठ कांग्रेस नेता और विधायक शमनूर शिवशंकरप्पा का रविवार (14 दिसंबर) को निधन हो गया. वो पिछले काफी समय से बीमार चल रहे थे और बेंगलुरु के एक अस्पताल में भर्ती थे, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली. उनके निधन से राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर है. उनके निधन पर सूबे के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने दुख जाहिर किया है.
सीएम ने कहा ‘पूर्व मंत्री, विधायक और पार्टी के वरिष्ठ नेता शमनूर शिवशंकरप्पा के निधन की खबर दुखद है. एक ऐसे राजनेता के जाने से समाज और दुखी हुआ है, जिन्होंने अपने जीवन में आरोपों से दूर रहकर अपनी ताकत लोगों की भलाई में लगाई भगवान शिवशंकरप्पा की आत्मा को शांति दे’. सीएम ने परिवार के प्रति संवेदना जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें ये दुख सहने की ताकत मिले.
मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने जताया दुख
वहीं शिवशंकरप्पा के निधन पर कर्नाटक सरकार में मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने दुख जताया. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “मुझे यह जानकर बहुत दुख हुआ कि कांग्रेस पार्टी के सीनियर लीडर, पूर्व मंत्री और विधायक शमनूर शिवशंकरप्पा का निधन हो गया. उनकी सादगी, दशकों तक बिना किसी स्वार्थ के लोगों की सेवा और पब्लिक लाइफ में उन्होंने जो मिसाल कायम की, उसे हमेशा याद रखा जाएगा.भगवान शिवशंकरप्पा की आत्मा को शांति दे और भगवान उनके परिवार और फैंस को यह दुख सहने की ताकत दे’.
95 साल के थे शिवशंकरप्पा
शिवशंकरप्पा 95 साल के थे, और दावणगेरे दक्षिण विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते थे. वह कुछ समय से बेंगलुरु के एक अस्पताल में भर्ती थे जहां उनका इलाज चल रहा था. शमनुरु परिवार दावणगेरे और मध्य कर्नाटक का प्रभावशाली राजनीतिक घराना है. उनके परिवार में तीन बेटे और चार बेटियां हैं. उनके बेटों में कर्नाटक के खान और भूविज्ञान एवं बागवानी मंत्री एस एस मल्लिकार्जुन भी शामिल हैं. उनकी बहू प्रभा मल्लिकार्जुन दावणगेरे से संसद सदस्य हैं.
कई पदों पर काम किया
पूर्व मंत्री शिवशंकरप्पा ने कई दशकों तक कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के कोषाध्यक्ष के रूप में कार्य किया और वह प्रभावशाली वीरशैव-लिंगायत समुदाय की सर्वोच्च संस्था ‘ऑल इंडिया वीरशैव महासभा’ के अध्यक्ष थे.वह एक प्रख्यात शिक्षाविद और एक उद्योगपति भी थे. उन्होंने कई शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना की. अपने राजनीतिक जीवन में उन्होंने संगठन और जनप्रतिनिधि, दोनों भूमिकाओं में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं.वो वीरशैव लिंगायत समाज के प्रभावशाली नेता माने जाते थे. उनके स्वामित्व में मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज, शुगर फैक्ट्रियां, मिल्स और कई व्यावसायिक समूह शामिल थे.

