यूपी पुलिस की गिरफ्त में आरोपी सिपाही
उत्तर प्रदेश पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है. कफ सिरप की अवैध तस्करी में शामिल फरार आरोपी और एसटीएफ का बर्खास्त सिपाही आलोक प्रताप सिंह आखिरकार गिरफ्त में आ गया है. पुलिस ने उसे लखनऊ से गिरफ्तार किया है. आलोक पर लुकआउट नोटिस जारी था और उसे भगोड़ा घोषित कर दिया गया था. सूत्रों के अनुसार, वह पिछले कुछ दिनों से सरेंडर करने की कोशिश में था, लेकिन उससे पहले ही एसटीएफ ने उसे पकड़ लिया.
आलोक प्रताप सिंह का नाम कफ सिरप की अवैध तस्करी के उस बड़े नेटवर्क में सामने आया था, जिसने उत्तर प्रदेश से लेकर बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और यहां तक कि बांग्लादेश तक अपने तार फैला रखे थे. जांच में पता चला कि यह पूरा नेटवर्क वाराणसी और जौनपुर के आसपास सक्रिय था और झारखंड की एक फर्म के साथ मिलकर नकली या अवैध तरीके से कफ सिरप तैयार कर उसे विभिन्न राज्यों और देशों में सप्लाई करता था.
आलोक की भूमिका इस रैकेट में काफी अहम मानी जा रही है. बताया जाता है कि उसका संबंध वाराणसी निवासी अमित टाटा से भी था, जिसे एसटीएफ पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है. इसके अलावा, आलोक के धनंजय सिंह जैसे प्रभावशाली लोगों से भी संबंध होने की बात सामने आई है. यह नेटवर्क न सिर्फ कफ सिरप की तस्करी करता था, बल्कि इसके नाम पर बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी के भी कई मामले जुड़े हुए हैं.
जांच के दौरान एसटीएफ को पता चला कि आलोक प्रताप सिंह ने भी अवैध कारोबार को मजबूती देने के लिए वाराणसी में एक मेडिकल फर्म बनाई थी. जनवरी 2024 में उसने मां शारदा मेडिकल नाम से एक फर्म पंजीकृत कराई थी. इस फर्म के जरिए उसने कागजों पर लाखों रुपए का कारोबार दिखाया, जबकि वास्तविकता में यह कफ सिरप के फर्जी लेनदेन को छिपाने का जरिया था.
कफ सिरप तस्करी का यह मामला पिछले कुछ महीनों से सुर्खियों में है. अब तक पूरे प्रकरण में लगभग 40 एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं और कई बड़े नामों का पर्दाफाश हुआ है. यूपी एसटीएफ ने मामले की तहकीकात में कई महत्वपूर्ण खुलासे किए हैं. इस रैकेट का एक बड़ा और सक्रिय सदस्य शुभम जयसवाल अब भी फरार है, जिसकी तलाश जारी है.

