दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे (Delhi Dehradun Expressway) की सर्विस लेन बनाने को लेकर विकल्प की तलाश की जा रही है. इस सर्विस लेन को बनाने की अड़चनें दूर करने का प्रयास किया जा रहा है. दरअसल, गाजियाबाद के मंडोला में सर्विस लेन के निर्माण का कार्य रूका हुआ है. इसकी वजह एक घर के कानूनी विवाद माना जा रहा है. यहां 50 मीटर लंबी सर्विस लेन का निर्माण कार्य होना है. नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) को अदालत के निर्णय का इंतजार है. जल्द ही मामले के निपटने की उम्मीद है.
दरअसल, इस एक्सप्रेसवे का निर्माण काम कई चरणों में बांटकर किया गया है. इसके दो चरण में 32 किलोमीटर तक लंबे हैं. दिल्ली में 17 किलोमीटर का हिस्सा एलिवेटेड बनाया है. जबकि, शेष 15 किलोमीटर का हिस्सा गाजियाबाद और बागपत जिले की सीमा में है. वहीं बागपत के मवीकला गांव में इस एक्सप्रेसवे को ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे से जोड़ा गया है.
एक्सप्रेसवे का हुआ ट्रायल
जानकारी के मुताबिक, एक्सप्रेसवे के दोनों खंड बनकर तैयार हो चुके हैं. एनएचएआई ने पिछले दिनों एक्सप्रेसवे पर ट्रायल भी किया था. इस दौरान भारी वाहन को दौड़ाया गया था. भारी वाहनों को चलाकर कई दिन जांच की गई. जिस पर संबंधित अधिकारियों ने कार्यगुणवत्ता को लेकर सहमति जताई थी. भारी वाहन दौड़ाए जाने के दौरान किसी प्रकार की कोई खामी नहीं पाई गई. यह एक्सप्रेसवे अक्षरधाम से शुरू होकर मंडोला एनबीसीसी टाउनशिप से बागपत के (मवीकला) के पास ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे से जुडा है. वहीं इससे आगे तीसरा चरण के कार्य का निर्माण किया गया है.
विवाद में उलझा सर्विस लेन का कार्य
एक अधिकारी ने जानकारी देते हुए कहा कि यह परियोजना वर्ष 2023 में पूरी होनी थी, लेकिन एक्सप्रेसवे के दोनों खंड का काम पिछड़ गया. पहले काम पूरा होने का दावा 31 मार्च तक किया था. इसके बाद 15 मई और फिर 15 अगस्त की तारीख तय हुई थी. मंडोला में सर्विस रोड के लिए करीब 50 मीटर जमीन पर विवाद होने से समय सीमा बढ़ गई. आवास विकास परिषद् को एनएचएआई को जमीन उपलब्ध करानी है. विवाद होने की वजह से समय पर जमीन एनएनएआई को नहीं मिल सकी. जमीन पर विवाद होने का मामला अदालत में है.
NHAI को कोर्ट के फैसले का इंतजार
एनएचएआई अधिकारी ने बताया कि एक मकान के विवाद की वजह से अड़चन आ रही है. कोर्ट से मामला निपटने के बाद आवास-विकास परिषद को मुआवजा देना है. एनएचएआई अधिकारी ने बताया सर्विस रोड की अड़चन दूर नहीं हो रही है. यही वजह है कि कार्य को पूरा नहीं किया जा सका. जबकि बाकी सभी शेष कार्य को पूरा कर लिया गया है.

