अगर आप भी एडवेंचर के शौकीन हैं और किसी ऐसी जगह की तलाश में हैं, जहां पर एडवेंचर के साथ रहस्य को करीब से महसूस कर सकें। तो आपके लिए उत्तराखंड की रूपकुंड झील परफेक्ट ट्रेकिंग डेस्टिनेशन हो सकती है। यह जगह समुद्र तल से करीब 16,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। रूपकुंड झील अपनी खूबसूरती के अलावा यहां पर मिले मानव कंकाल के कारण पूरी दुनिया में फेमस है। हालांकि यहां पर पहुंचना इतना भी आसान नहीं है और मौसम भी चुनौतियों को बढ़ा सकता है।
दिल्ली से रूपकुंड की दूरी
दिल्ली से रूपकुंड के बेस कैंप लोहाजंग तक की दूरी सड़क मार्ग से करीब 480-530 किमी है। कार से जाने में करीब 15 से 17 घंटे का समय लग सकता है। अगर आप अपनी फैमिली या दोस्तों के साथ दिल्ली आते हैं, तो मेरठ, दिल्ली से रूपकुंड के बेस कैंप लोहाजंग तक आएंगे। फिर लोहागंज से रूपकुंड तक का सफर पैदल ट्रेक करके पूरा किया जाता है।
कंकालों की झील
प्राप्त जानकारी के मुताबिक रूपकुंड में बर्फ पिघलने पर मानव अवशेष दिखाई देते हैं। साल 2019 में एक वैज्ञानिक स्टडी में सामने आया था कि यहां पर मिले कंकाल अलग-अलग आनुवंशिक समूहों से जुड़े हैं। वहीं कुछ अवशेष करीब 1200 साल पुराने बताए जाते हैं। हालांकि इनके यहां तक पहुंचने की कहानी आज भी रहस्य बनी हुई है।
रूपकुंड का ट्रैक करीब 50 किमी से ज्यादा लंबा और कठिन माना जाता है। रास्ते में आपको घास के मैदान, जंगल, ग्लेशियर और बर्फीले हिस्से मिलेंगे। ट्रैक का सबसे ऊंचा हिस्सा करीब 5,000 मीटर की ऊंचाई पर है। ट्रैकिंग एक्सपर्ट कहते हैं कि पहली बार यहां पर जाने वाले लोगों को अनुभवी गाइड और पर्याप्त तैयारी के साथ यहां जाना चाहिए।
इन बातों का रखें ध्यान
इस ट्रैक पर मौसम तेजी से बदल सकता है। इसलिए अपने साथ रेनकोट और गर्म कपड़े जरूर रखें। जींस की जगह पर आरामदायक ट्रेकिंग कपड़े और मजबूत जूते पहनें। प्लास्टिक या कचरे को रास्ते में न फैलाएं। स्थानीय प्रशासन और ट्रेकिंग गाइड के सभी सुरक्षा निर्देशों का पालन करें।

