रूसी राष्ट्रपति कार्यालय-सह-आवास ‘क्रेमलिन’ ने शुक्रवार को कहा कि एक नये आयात समझौते के तहत रूसी डीजल लेकर जाने वाला पहला टैंकर रवाना हो गया है। यह घटनाक्रम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के दो हफ्ते बाद हुआ है, जिसमें उन्होंने कहा था कि यूक्रेन पर रूस के हमले के बावजूद उन्होंने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ एक समझौता किया है। रूसी समाचार एजेंसी ‘इंटरफैक्स’ के अनुसार, रूस के उप प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने इस सप्ताह की शुरुआत में कहा कि पहली खेप में 40,000 टन डीजल होगा।
समुद्री खुफिया फर्म केप्लर ने बताया कि जहाज से संकेत मिल रहे हैं कि वह 7 नवंबर को न्यूयॉर्क पहुंचने वाला है। यह जुलाई 2023 के बाद से अमेरिका पहुंचने वाली रूस की पहली डीजल खेप होगी। अपने पड़ोसी देश पर हमले को लेकर रूस के खिलाफ अमेरिकी प्रतिबंध नीति में अचानक आया बदलाव, मध्यावधि चुनावों से पहले ईंधन की ऊंची कीमतों से निपटने के लिए ट्रंप के एक प्रयास के रूप में देखा गया।
करीब 40,000 टन डीजल की खेप लगभग 300,000 बैरल के बराबर है, जो अमेरिकी अर्थव्यवस्था द्वारा एक दिन में खपत किए जाने वाले लगभग 40 लाख (40 लाख) बैरल डीजल का लगभग 7 प्रतिशत है। ऊर्जा नीति विशेषज्ञों का कहना है कि इस आयात समझौते से — जिसके बारे में ट्रंप का कहना है कि इससे आगामी महीनों में लाखों टन और रूसी डीजल अमेरिका पहुंचेगा — पेट्रोल पंप या अन्य जगहों पर बहुत अधिक कीमतों में कोई खास कमी आने की संभावना नहीं है। रूस की तेल रिफाइनरियों पर यूक्रेन के लगातार लंबी दूरी वाले ड्रोन हमलों के कारण वहां डीजल उत्पादन पर दबाव आ गया था।
इन हमलों की वजह से ईंधन की कमी हो गई थी, जो अब कुछ हद तक दूर हुई है। पिछले महीने ट्रंप ने कीव से इन हमलों को रोकने के लिए कहा था।

