नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (IGI) पर बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के सूचना और रणनीति सलाहकार ज़ाहिद उर रहमान को कुछ देर के लिए रोके जाने का मामला अब दोनों देशों के बीच राजनयिक तनाव का रूप लेता जा रहा है। बांग्लादेश ने इस पूरे प्रकरण पर भारत द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण को “असंतोषजनक” करार दिया है। सरकारी समाचार एजेंसी ‘BSS’ के अनुसार, बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बुधवार को इस घटना को “दुर्भाग्यपूर्ण और खेदजनक” बताया। प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि राजनयिक चैनलों के माध्यम से भारतीय अधिकारियों को पहले ही सूचित कर दिया गया था कि रहमान ‘इंडियन ओशन रिम एसोसिएशन’ (IORA) की बैठक में बांग्लादेशी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने वाले थे। इसके बावजूद, इस महीने की शुरुआत में दिल्ली एयरपोर्ट पर आव्रजन (Immigration) अधिकारियों ने उन्हें रोक दिया, जिसके कारण वह अपनी तय योजना के अनुसार आगे की यात्रा जारी नहीं रख सके।
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सत्यापन के बाद मिली थी अनुमति: भारत का पक्ष
ढाका की यह तीखी टिप्पणी भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा जारी किए गए उस बयान के ठीक एक दिन बाद आई है, जिसमें घटना का विवरण दिया गया था। भारत ने कहा था कि आव्रजन अधिकारियों द्वारा यात्रा का मकसद सत्यापित (Verify) करने के बाद रहमान को देश में प्रवेश की अनुमति दे दी गई थी, लेकिन उन्होंने खुद ही ढाका लौटने का फैसला किया।
सत्तारूढ़ गलियारों से आ रही खबरों के मुताबिक, सुरक्षा से संबंधित एक ‘वॉचलिस्ट’ में नाम आने के कारण दिल्ली एयरपोर्ट पर रहमान को कुछ देर के लिए रोका गया था, जिस पर बांग्लादेश ने नई दिल्ली के समक्ष औपचारिक विरोध (Formal Protest) भी दर्ज कराया था।
साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा था: “बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के सलाहकार 14 जून को SAARC वीज़ा के साथ अपने निजी पासपोर्ट पर भारत आए थे, ताकि ‘इंडियन ओशन रिम एसोसिएशन’ (IORA) के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक में भाग ले सकें। आव्रजन अधिकारियों ने उनके आगमन पर केवल औपचारिकता के तहत पूछताछ की और फिर उन्हें प्रवेश की अनुमति दे दी थी। हालांकि, इसके बाद उन्होंने अपनी मर्जी से ढाका लौटने का फैसला किया।”
क्या थी IORA की वह बैठक?
विदेश मंत्रालय ने 15 और 16 जून को नई दिल्ली में इंडियन ओशन रिम एसोसिएशन (IORA) के सीनियर अधिकारियों की समिति (CSO) की 28वीं बैठक आयोजित की थी। इस उच्च स्तरीय बैठक का उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए संस्थागत पहलों का आकलन करना और आगामी IORA एक्शन प्लान (2028-2032) की रूपरेखा तैयार करना था।
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राजनयिक प्रोटोकॉल के बावजूद प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख को सुरक्षा जांच के दायरे में लाए जाने को लेकर बांग्लादेशी खेमे में गहरी नाराजगी है, और भारत के जवाब को नाकाफी मानकर दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर बातचीत अभी भी जारी है।
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