इजरायल चाहे कितना भी रौद्र रूप दिखा ले, कितनी भी बड़ी-बड़ी बातें कर ले, अपनी जिद पर अड़ने का स्वांग करें, लेकिन सच्चाई तो यह है कि लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ इजरायल को हमले बंद करने पड़े हैं। यूनाइटेड नेशंस का बयान भी आ गया है कि 23 जून मंगलवार वो दिन था जिस दिन ना तो इजरायल ने साउथ लेबनान पर हिजबुल्ला पर अटैक किया और ना ही हिजबुल्लाह की तरफ से कोई एक्शन हुआ। यानी पूरे दिन अमन रहा, शांति रही। 2 मार्च को ईरान, अमेरिका इजरायल जंग के बीच हिजबुल्ला भी कूद पड़ा था और तब से 22 जून तक एक दूसरे पर हमलों का सिलसिला जारी रहा। यहां तक कि ईरान अमेरिका पीस डील का जब मसौदा तय हो रहा था तो ईरान ने साफ कह दिया था कि वह डील को तभी मानेगा जब लेबनान में हिजबुल्ला पर इजरायल के हमले रुकेंगे।
अमेरिका ने भी बहुत प्रेशर बनाया लेकिन पीएम नेतन्याहू मान ही नहीं रहे थे। हिजबुल्ला भी साउथ लेबनान में इजरायल का भरपूर जवाब दे रहा था। कई बार हिजबुल्लाह के चीफ नईम कासिम ने वीडियो पैगाम में कहा भी कि हिजबुल्ला हथियार डाल देगा। यह बात भूल जाओ। अपनी जमीन की रक्षा के लिए हिजबुल्लाह लड़ेगा आखिरी सांस तक लड़ेगा। चाहे कितनी भी लंबी लड़ाई लड़नी पड़ जाए। यही वजह रही कि जंग चलती रही लेबनान और नॉर्थ इजरायल के बीच। कभी ज्यादा, कभी कम, कभी हिजबुल्लाह अटैक कर रहा था तो कभी इजरायल। कभी इजरायल के फौजी मारे जा रहे थे तो कभी हिजबुल्ला के लड़ाके। कभी इजरायल के हमलों से साउथ लेबनान में इमारतें गिर रही थी तो कभी सिविलियन की जाने जा रही थी। लेकिन 23 जून को यह सब रुका रहा। इसकी वजह ईरान की फील्डिंग रही। स्विट्जरलैंड में जब ईरान अमेरिका के दरमियान बात हो रही थी तो ईरान का डेलीगेशन इसलिए भी उठकर बाहर निकल गया था क्योंकि इजरायल लेबनान पर हमले रोक नहीं रहा था और तो और बाद में स्विट्जरलैंड से ओमान की तरफ रवाना हो रहे डेलीगेशन के एक अहम प्रतिनिधि मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने चलते प्लेन में मीडिया को बताया था कि हम लोग बीच बैठक से उठकर इसलिए चले गए थे क्योंकि ट्रंप का धमकी वाला बयान आया जिसमें कहा गया था कि ईरान अगर अपने प्रॉक्सी हिजबुल्लाह को रोकता नहीं है तो हम ईरान पर दोबारा हमला करेंगे और जो लोग स्विट्जरलैंड से आए हैं ईरान की तरफ से वो भी जिंदा नहीं लौट पाएंगे।
यह सुनने के बाद ईरान के डेलीगेशन ने वहां मौजूद अमेरिकी वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस से कहा कि जो डील हो रही है उसका पहला ही पॉइंट है कि एक दूसरे के खिलाफ इस तरह के दुश्मनी वाले बयान नहीं दिए जाएंगे। एक्सपर्ट कहते हैं कि दरअसल ट्रंप इजरायल को समझा नहीं पा रहे थे। इसलिए ईरान पर खीज उतार रहे थे और कह रहे थे कि ईरान हिजबुल्लाह को समझाए। इसके बाद इस डील के मीडिएटर पाकिस्तान और क़तर ने उन्हें समझाया कि बातचीत चलती रहनी चाहिए। फिर सहमति बनी कि लेबनान के इशू पर इजरायल को रुकना पड़ेगा।
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