मिडिल ईस्ट में कई महीनों तक चले तनाव और संघर्ष के बाद दुनिया को उम्मीद थी कि अमेरिका और ईरान के बीच हुआ समझौता क्षेत्र में स्थिरता लेकर आएगा। फ्रांस में दोनों देशों ने एक अंतरिम शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए और तय हुआ कि 19 जून से डील की शर्तों पर आगे की औपचारिक बातचीत शुरू होगी। लेकिन अब घटनाक्रम अचानक नया मोड़ ले लिया है। दरअसल शांति समझौते के बाद अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों की पहली औपचारिक बैठक स्विट्जरलैंड के बैगन स्टॉक रिसोर्ट में होनी थी।
इसे भी पढ़ें: शांति समझौते के 24 घंटे के भीतर Lebanon लहूलुहान! इज़राइली हमलों में 16 मौतें, US-Iran ‘ऐतिहासिक डील’ पर मंडराया संकट
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडवेंस को इस वार्ता में हिस्सा लेने के लिए रवाना होना था। लेकिन अब खबर आई है कि उनकी यात्रा आखिरी समय पर रद्द कर दी गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक फैसला इतना अचानक लिया गया कि वेंस का स्टाफ और उनके साथ जाने वाले पत्रकार एयरपोर्ट तक पहुंच चुके थे। जबकि कई अमेरिकी अधिकारी और विदेशी मीडिया प्रतिनिधि पहले से ही स्विट्जरलैंड में मौजूद थे। यही वह घटनाक्रम है जिसने पूरी पीस डील के भविष्य को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि इस रुकावट की सबसे बड़ी वजह लेबनान को लेकर पैदा हुआ नया विवाद है। शांति समझौते में क्षेत्र के सभी मोर्चे पर लड़ाई रोकने की बात शामिल है। जिसमें लेबनान भी शामिल था। लेकिन इसी बीच इजराइल ने साफ कर दिया कि वह दक्षिणी लेबनान से अपनी सेना नहीं हटाएगा। इतना ही नहीं शांति समझौता लागू होने के बाद भी लेबनान में इजराइली हमले जारी रहे हैं। जिनमें तीन लोगों की मौत की खबर भी सामने आई है। यहीं से ईरान और अमेरिका के बीच आगे की बातचीत को लेकर मतभेद बढ़ते दिखाई दे रहे हैं।
इसे भी पढ़ें: Netanyahu का ‘ईरान मिशन’ फेल! Donald Trump की शांति डील से ‘बीबी’ के सियासी भविष्य पर संकट?
हालांकि दूसरी ओर कुछ सकारात्मक संकेत भी मिले हैं। पीस डील पर हस्ताक्षर होने के बाद हॉर्मज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही फिर से तेज हो गई है। सऊदी अरब के झंडे वाले कई बड़े तेल टैंकर इस अहम समुद्री मार्ग से सुरक्षित गुजर चुके हैं। जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजारों को राहत मिली है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल अभी भी वही है। क्या अमेरिका और ईरान के बीच समझौते को आगे बढ़ाया जाएगा या लेबनान और इजराइल से जुड़ा विवाद इस पूरी प्रक्रिया को पटरी से उतार देगा। फिलहाल दुनिया की नजरें मध्य पूर्व पर टिकी है।

