नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में बुधवार सुबह एक बेहद दर्दनाक हादसा हो गया। यहाँ स्थित ‘फ्लरिश स्टे’ (Flourish Stay) नामक होटल में भीषण आग लगने से 21 लोगों की मौत हो गई, जबकि 35 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। इस हृदयविदारक घटना में जान गंवाने वालों में 11 विदेशी और 10 भारतीय नागरिक शामिल हैं। हादसे ने एक बार फिर प्रशासनिक लापरवाही की पोल खोल दी है, क्योंकि यह होटल बिना अग्नि सुरक्षा अनापत्ति प्रमाणपत्र (Fire NOC) के संचालित हो रहा था।
रेस्क्यू में 10 पुलिसकर्मी झुलसे, 10 विदेशी नागरिक वेंटिलेटर पर
आग लगने की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और राहत-बचाव कार्य शुरू किया। दमकल कर्मियों और दिल्ली पुलिस ने अपनी जान पर खेलकर 37 लोगों को सुरक्षित रेस्क्यू किया। इस दौरान लोगों को बचाते हुए 10 पुलिसकर्मी भी झुलस गए, जिनका दिल्ली के अस्पतालों में इलाज चल रहा है।
घायलों में 21 विदेशी और 14 भारतीय नागरिक शामिल हैं। विदेशी नागरिकों में से 10 की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है और उन्हें वेंटिलेशन सपोर्ट पर रखा गया है। पुलिस के अनुसार, हताहत हुए विदेशी नागरिक मुख्य रूप से नाइजीरिया, मोज़ाम्बिक, बांग्लादेश और लाइबेरिया के रहने वाले हैं।
शवों की शिनाख्त के लिए होगी डीएनए जांच (DNA Profiling)
अग्निकांड इतना भीषण था कि कई शव बुरी तरह झुलस गए हैं, जिससे उनकी पहचान करना मुश्किल हो गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि:
किसी भी प्रकार की चूक से बचने के लिए सभी विदेशी नागरिकों की डीएनए (DNA) जांच कराई जाएगी।
डीएनए मिलान और पहचान की आधिकारिक पुष्टि होने के बाद ही शव परिजनों या संबंधित देशों के दूतावासों को सौंपे जाएंगे।
इस पूरी प्रक्रिया के लिए दिल्ली पुलिस लगातार विदेश मंत्रालय (MEA) के संपर्क में है और फिलहाल सभी शवों को सुरक्षित मोर्चरी में रखा गया है।
मुख्यमंत्री ने किया अस्पताल का दौरा, 10-10 लाख रुपये मुआवजे का ऐलान
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बुधवार को साकेत स्थित मैक्स अस्पताल का दौरा कर घायलों का हाल जाना। उन्होंने डॉक्टरों के साथ उपचार की समीक्षा की और अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि मरीजों की देखभाल में कोई कमी न रहे।
सरकार द्वारा की गई घोषणाएं:
मुफ्त इलाज: सभी घायलों के इलाज का संपूर्ण खर्च दिल्ली सरकार द्वारा उठाया जाएगा।
मृतकों के परिजनों को: 10 लाख रुपये की अनुग्रह राशि।
गंभीर रूप से घायलों को: 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता।
एमसीडी की बड़ी लापरवाही: पूर्व फायर चीफ का बड़ा खुलासा
इस अग्निकांड में 21 लोगों की मौत महज एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की बड़ी नाकामी है। दिल्ली अग्निशमन सेवा (DFS) के पूर्व निदेशक अतुल गर्ग ने एक बड़ा बयान देते हुए लाइसेंसिंग प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
गर्ग ने स्पष्ट किया कि इस होटल की फाइल कभी भी फयर विभाग के पास भेजी ही नहीं गई थी। उन्होंने कहा:
“लाइसेंस जारी करने की प्राथमिक जिम्मेदारी हमारी नहीं बल्कि एमसीडी (MCD) की होती है। एमसीडी या अन्य एजेंसियां जब मामले हमारे पास भेजती हैं, तभी हम निरीक्षण कर NOC जारी करते हैं। इस मामले में न तो आवेदक ने फायर NOC के लिए आवेदन किया और न ही एमसीडी ने यह मामला हमारे पास भेजा।”
चूंकि फायर विभाग को कभी सूचित ही नहीं किया गया, इसलिए होटल में कभी कोई अग्नि सुरक्षा निरीक्षण (Fire Safety Audit) नहीं हुआ और न ही यह तय किया गया कि संचालन से पहले वहां कौन-से फायर सेफ्टी उपकरण लगाए जाने चाहिए। इस खुलासे के बाद अब नगर निगम (MCD) की कार्यप्रणाली और अवैध रूप से चल रहे होटलों पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं।

