Mira Bhayander Municipal Corporation
बीजेपी ने मीरा-भायंदरनगर निगम चुनाव 2026 में स्पष्ट बहुमत से सत्ता हासिल कर ली है, लेकिन विपक्षी दलों की गतिविधियों के कारण नगर निगम की राजनीति गरमा गई है. कांग्रेस और शिवसेना (शिंदे गुट) के पार्षदों ने गठबंधन कर लिया है. दोनों दलों ने मीरा भायंदर विकास अघाड़ी नाम से संगठन बनाया है.
जानकारी के मुताबिक विपक्ष के रूप में कांग्रेस और शिवसेना (शिंदे गुट) के नगरसेवकों ने एकजुट होकर मीरा-भायंदर शहर विकास आघाड़ी का गठन किया है. इस आघाड़ी के नेता के रूप में कांग्रेस के नगरसेवक जय ठाकूर का चयन किया गया है. कल कोकण भवन में इस संबंध में गुट पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी की गई.
मीरा-भायंदर विकास अघाड़ी का गठन
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने बताया कि कांग्रेस और शिवसेना (शिंदे समूह) के पार्षदों ने गठबंधन कर मीरा भायंदर विकास अघाड़ी का गठन किया है. इस घटनाक्रम के चलते नगर निगम में विपक्ष के नेता के पद के लिए रास्ता आधिकारिक तौर पर साफ हो गया है.
बीजेपी के 78 नगरसेवक
महानगरपालिका में कुल 95 निर्वाचित नगरसेवक हैं, जिनमें से 78 नगरसेवक बीजेपी के होने के कारण सत्ता पूरी तरह बीजेपी के पास है. वहीं विपक्ष में कांग्रेस के 13, शिवसेना के 3 और 1 अपक्ष (निर्दलीय) नगरसेवक हैं. इस प्रकार कांग्रेस और शिवसेना को मिलाकर कुल विपक्षी संख्या 16 हो गई है.
सबसे बड़ी विपक्षी आघाड़ी
महानगरपालिका के नियमों के अनुसार, सत्ताधारी दल के अलावा सबसे अधिक संख्या वाले दल या आघाड़ी को विपक्ष के नेता का पद मिलता है. इसी अनुसार, मीरा-भायंदर शहर विकास आघाड़ी महानगरपालिका की सबसे बड़ी विपक्षी आघाड़ी बन गई है, जिससे विपक्ष के नेता पद का रास्ता साफ हो गया है. इसके साथ ही स्थायी समिति में सदस्य पद और स्वीकृत (नामांकित) नगरसेवक के लिए भी अब मार्ग प्रशस्त हो गया है.
बीजेपी ने क आलोचना
इस बीच बीजेपी ने इन घटनाक्रमों की कड़ी आलोचना की है. मनपा चुनाव से पहले बीजेपी के विधायक नरेंद्र मेहता ने कई बार प्रेस कॉन्फ्रेंस और सभा में शिवसेना और कांग्रेस के बीच गुप्त गठबंधन का आरोप लगाया था. बीजेपी नेताओं का कहना है कि यह आरोप सच साबित हो रहा है. बीजेपी ने कहा कि कांग्रेस और शिवसेना द्वारा बनाई गईं मीरा भायंदर विकास अघाड़ी मेहता के आरोप को सही साबित कर रही है. नेताओं का कहना है कि विपक्ष का दोहरा चेहरा जनता के सामने बेनकाब हो गया है.
शिवसेना एक तरफ कांग्रेस के साथ गठबंधन कर बीजेपी की ताकत कम करना चाहती, तो वही दूसरी तरफ मराठी एकीकरण समिति द्वारा मराठी महापौर बनाए जाने के मुद्दे पर बीजेपी का साथ देते हुए मराठी एकीकरण समिति और मनसे के आंदोलन का विरोध कर रही है.
राजनीतिक संघर्ष होगा तेज!
कुल मिलाकर, भले ही मीरा-भयंदर नगर निगम में बीजेपी सत्ता में है, लेकिन माना जा रहा है कि ‘मीरा-भायंदर विकास अघाड़ी’ के कारण राजनीतिक संघर्ष और भी तीव्र होगा.राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह गठबंधन आने वाले दिनों में सदन में बीजेपी के फैसलों के खिलाफ संगठित और आक्रामक विरोध का रूप ले सकता है.

