मणिकम टैगोर बी
तमिलनाडु के गवर्नर आर एन रवि के असेंबली में अपना पारंपरिक भाषण दिए बिना बाहर चले जाने पर विवाद बढ़ता जा रहा है. कांग्रेस सांसद मणिक्कम टैगोर ने मंगलवार को कहा कि राज्य अपने लोकतांत्रिक संस्थानों के कमजोर होने को स्वीकार नहीं करेगा और गवर्नर को संवैधानिक पद का दुरुपयोग करना बंद करना चाहिए.
तमिलनाडु के गवर्नर रवि साल असेंबली से बाहर जाने के बाद सत्ताधारी DMK सरकार कई आरोप लगाए हैं. वहीं मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने परंपरा और नैतिकता का उल्लंघन करते हुए बाहर चले जाने के लिए गवर्नर की आलोचना की और बाद में एक प्रस्ताव पेश किया जिसमें कहा गया कि भाषण के अंग्रेजी संस्करण को पढ़ा हुआ मान लिया जाए.
कांग्रेस सांसद ने गवर्नर पर साधा निशाना
इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस सांसद टैगोर ने कहा, “गवर्नर रवि बार-बार भारत के संविधान का पालन करने से इंकार क्यों करते हैं? एक बार फिर उन्होंने ऐसा काम किया है, जो तमिलनाडु विधानसभा लोगों की लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई संस्था को कमजोर करता है और उसका अपमान करता है.”
टैगोर ने तमिल में एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि संविधान साफ है कि गवर्नर एक संवैधानिक प्रमुख होता है, न कि कोई समानांतर सत्ता.
राज्य सरकार के कदम को बताया संवैधानिक
टैगोर ने सरकार के बचाव में कहा कि राज्यपाल को चुनी हुई राज्य सरकार की मदद और सलाह पर काम करना चाहिए, यह अनुच्छेद 163 कहता है. उन्होंने कहा, “निजी राय पढ़ना, विधानसभा के भाषण में चुनिंदा बदलाव करना या अनिश्चित काल के लिए मंज़ूरी रोकना संवैधानिक विवेक नहीं है, यह संवैधानिक अवज्ञा है.”
कांग्रेस नेता ने कहा, “सदन का अनादर करना किसी पार्टी का अनादर करना नहीं है, यह लोकतंत्र और संघवाद का अनादर करना है.” उन्होंने कहा, “सुप्रीम कोर्ट के फैसले (एसआर बोम्मई, नबाम रेबिया) साफ हैं, राज्यपालों को निष्पक्षता, संयम और संवैधानिक नैतिकता के साथ काम करना चाहिए. न कि केंद्र के राजनीतिक एजेंट के रूप में.” टैगोर ने ज़ोर देकर कहा कि तमिलनाडु अपने लोकतांत्रिक संस्थानों के कमज़ोर होने को स्वीकार नहीं करेगा.

