Budget 2026: इस साल के बजट 2026 को भारत के टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए निर्णायक मोड़ माना जा रहा है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर्स और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर में भारत खुद को ग्लोबल हब बनाना चाहता है, लेकिन रास्ते में कई संरचनात्मक बाधाएं हैं. इंडस्ट्री का मानना है कि अब दिक्कत पूंजी की नहीं, बल्कि बिजली, मंजूरी और स्पष्ट नीतियों की है. ऐसे में बजट 2026 से टेक सेक्टर को बड़ी और ठोस घोषणाओं की उम्मीद कर रहा है.
AI और डेटा सेंटर: भारत की डिजिटल रीढ़
भारत तेजी से AI, क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का ग्लोबल सेंटर बनने की ओर बढ़ रहा है. इस दौड़ में डेटा सेंटर्स सबसे अहम कड़ी बन चुके हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक करीब 67.5 बिलियन डॉलर का ग्लोबल निवेश पहले से भारत की ओर आ रहा है. Microsoft, Amazon और Google जैसी कंपनियां अरबों डॉलर की AI और डेटा सेंटर परियोजनाओं की घोषणा कर चुकी हैं. ऐसे में Budget 2026 में आप AI और डेटा सेंटर्स को लेकर बड़ी घोषणाओं की उम्मीद कर सकते हैं.
बिजली बनी सबसे बड़ी चुनौती
AI आधारित वर्कलोड्स ने डेटा सेंटर्स की बिजली जरूरत को कई गुना बढ़ा दिया है. एक AI रैक, पारंपरिक क्लाउड सिस्टम की तुलना में पांच से छह गुना ज्यादा बिजली खपत करता है. यही वजह है कि पावर सप्लाई और ग्रिड की विश्वसनीयता सबसे बड़ा चिंता का कारण बन गई है. इंडस्ट्री लीडर्स का मानना है कि सरकार को सस्ती और भरोसेमंद ग्रीन पावर, अलग टैरिफ कैटेगरी और फास्ट अप्रूवल सिस्टम पर फोकस करना होगा. बिना स्थिर बिजली के कोई भी निवेश लंबे समय तक टिक नहीं सकता.
सस्टेनेबिलिटी अब विकल्प नहीं, जरूरत
डेटा सेंटर्स और AI इंफ्रास्ट्रक्चर में सस्टेनेबिलिटी अब सिर्फ औपचारिकता नहीं रही. ग्लोबल कंपनियां कम कार्बन, वाटर एफिशिएंट और एनर्जी सेविंग इंफ्रास्ट्रक्चर चाहती हैं. Budget 2026 से उम्मीद है कि सरकार ग्रीन डेटा सेंटर्स को टैक्स इंसेंटिव, तेज डिप्रिसिएशन और लिक्विड कूलिंग जैसी नई टेक्नोलॉजी के लिए सपोर्ट देगी. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर अभी सही फैसले नहीं लिए गए, तो भारत दशकों तक कार्बन-हेवी सिस्टम में फंस सकता है.
डेटा संप्रभुता और रेगुलेटरी स्पष्टता
DPDP Act के बाद भारत में डेटा लोकलाइजेशन एक बड़ा फैक्टर बन गया है. बैंकिंग, मैसेजिंग और कई डिजिटल सेवाओं के लिए देश में ही डेटा स्टोर करना जरूरी हो चुका है. इससे डेटा सेंटर्स की मांग तो बढ़ी है, लेकिन नियमों की अस्पष्टता निवेश को धीमा करती है. इंडस्ट्री चाहती है कि Budget 2026 में डेटा लोकलाइजेशन और क्रॉस-बॉर्डर डेटा फ्लो पर साफ और समयबद्ध दिशा-निर्देश दिए जाएं, ताकि ग्लोबल कंपनियों का भरोसा और मजबूत हो.
मैन्युफैक्चरिंग, MSME और सप्लाई चेन की कसौटी
Budget 2026 सिर्फ टेक सेक्टर तक सीमित नहीं रहेगा. सरकार के सामने मैन्युफैक्चरिंग और चीन पर बढ़ती आयात निर्भरता को कम करने की बड़ी चुनौती है. करीब 100 प्रोडक्ट्स की पहचान की गई है, जिनमें आयात ज्यादा और घरेलू सप्लाई कमजोर है. MSME सेक्टर, जो भारत के 46 फीसदी एक्सपोर्ट का आधार है, सबसे ज्यादा दबाव में है. बजट से सस्ते लोन, क्रेडिट गारंटी और टैरिफ शॉक्स से सुरक्षा की उम्मीद की जा रही है.
सेमीकंडक्टर और रेयर अर्थ: भविष्य की लड़ाई
इलेक्ट्रॉनिक्स में भारत ने प्रगति की है, लेकिन सेमीकंडक्टर अभी भी कमजोर कड़ी हैं. सरकार ने India Semiconductor Mission के तहत बड़े निवेश मंजूर किए हैं, जिससे चिप मैन्युफैक्चरिंग को रफ्तार मिल सके. वहीं रेयर अर्थ मिनरल्स में भारत के पास दुनिया के तीसरे सबसे बड़े भंडार हैं, लेकिन उत्पादन बेहद कम है. Budget 2026 से उम्मीद है कि सरकार रेयर अर्थ प्रोसेसिंग, मैग्नेट मैन्युफैक्चरिंग और क्रिटिकल मिनरल सप्लाई चेन पर ठोस रोडमैप पेश करेगी.
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