मूली को खाएं ऐसे, नहीं बनेगी गैसImage Credit source: Getty Images
कुछ सब्जियों को सर्दियों में खाने का अलग ही मजा है. बथुआ, पालक, सरसों जैसी कई सब्जियां सिर्फ सर्दी में आती हैं. ये शरीर को कई फायदे पहुंचाती हैं लेकिन इन्हें खाने की असली वजह इनका स्वाद है. वैसे इन सब्जियों में से एक फूड मूली भी है जो भले ही पूरे साल मिलती हो लेकिन सर्दी में इसे खाने की बात ही अलग है. ठंडी होने के बावजूद इसे विंटर सीजन में बड़े शौक से खाया जाता है. कुछ लोग मूली को खाते नहीं है क्योंकि ये गैस, एसिटिडी या ब्लोटिंग का कारण बन जाती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि अगर इसे सही तरीके से खाया जाए तो इसके साइड इफेक्ट्स को कम किया जा सकता है.
इस आर्टिकल में हम आपको बताने जा रहे हैं कि आप किस तरह मूली को खाकर इससे होने वाली कुछ हेल्थ प्रॉब्लम्स से खुद को बचा सकते हैं. साथ ही जाने कि सर्दियों के इस सुपरफूड में कौन-कौन से पोषक तत्व होते हैं.
मूली के पोषक तत्व
मूली को पोषक तत्वों का भंडार माना जाता है क्योंकि इसमें विटामिन सी और फाइबर समेत कई न्यूट्रिएंट्स होते हैं. ह्यूमन न्यूट्रिशन एंड मेटाबॉलिज्म की स्टडी के मुताबिक ये पोषक तत्व ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल में रखने में कारगर हैं. इस तरह डायबिटीज के खतरे को कुछ हद तक कम किया जा सकता है. मूली में पानी भी काफी होता है इसलिए ये हमें हाइड्रेट रखती हैं और फाइबर के कारण हमारा पेट भी हेल्दी रहता है.

किस टाइप की मूली होती है बेस्ट
भारत में सबसे ज्यादा सफेद मूली को ही खाया जाता है लेकिन क्या आप जानते हैं कि लाल मूली में स्ट्रांग फ्लेवर होता है और इसी वजह से अधिकतर लोग इसे पंसद नहीं करते हैं. वहीं सफेद मूली में पानी काफी होता है इसलिए इसे पचाना आसान है. सही मूली को चुनने का तरीका भी हमें गैस और अपच से बचाता है.

किस तरह तैयार करें मूली की सब्जी या दूसरी चीजें
मूली से गैस न बने इसके लिए इसे पकाने के तरीके पर खास ध्यान देना चाहिए. एक्सपर्ट कहते हैं कि इसे लाइट वेट फूड बनाएं. भारत में लोग सर्दियों के दौरान तेल-मसालों के साथ मूली की भुजिया तैयार करके घी वाली रोटी के साथ खाते हैं. ये तरीका आजमाने से मूली पेट की दिक्कतों को बढ़ाती है और हर समय भारीपन भी रहता है. इसकी जगह मूली को स्टीम या शैलो फ्राई करके खाने से फाइबर सॉफ्ट होता है और स्वाद भी बढ़ता है. कुकिंग का ये तरीका कार्ब्स को भी ब्रेक करता है जिस वजह से भी ब्लोटिंग या गैस के होने का डर कम हो जाता है.
आप चाहे तो मूली का अचार या इसे फर्मेंट करके खा सकते हैं. इस प्रोसेस की वजह से इसमें प्रोबायोटिक्स बढ़ते हैं. मूली को इस तरह खाने से शरीर में गुड बैक्टीरिया बढ़ते हैं और डाइजेशन या गट हेल्थ में सुधार आता है. मूली का अचार झटपट बनाने के लिए इसके टुकड़े कर लें और एप्पल साइडर विनेगर में मैरीनेट करें. इस दौरान इसमें नमक और चीनी भी जरूरत के हिसाब से डाल लें. करीब आधे घंटे के बाद आपका मूली का टेस्टी अचार तैयार होगा.
मूली के साथ नींबू और अदर को खाने से भी हमारा पाचन तंत्र दुरुस्त हो पाता है. अदरक की वजह से ब्लोटिंग कम होती है क्योंकि इसमें एंटीइंफ्लामेटरी प्रॉपर्टीज होती हैं. मूली की सलाद में नींबू का रस और काला नमक डालकर खाने से भी पेट की हेल्थ ठीक रहती है. प्रोबायोटिक्स के साथ मूली को खाना चाहते हैं तो इसके लिए आप दही को सेलेक्ट कर सकते हैं.

मूली को खाने का कौन सा तरीका बेस्ट है
मूली को खाने से कोई दिक्कत न हो और अच्छा महसूस करें तो इसके लिए टुकड़ों में खाने की आदत डालें. हद से ज्यादा खाने से भारीपन का होना तय है. धीरे-धीरे मूली को खाएं और देखें कि आपकी बॉडी में इसका कोई रिएक्शन तो नहीं हो रहा है. शुरू में अगर पॉजिटिव रिस्पॉन्स मिले तो आगे चलकर आप इसे खाने की लिमिट को बढ़ा सकते हैं.

