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उत्तर प्रदेश के कानपुर नगर निगम का राजनीतिक तापमान आजकल काफी गरम है. उसका सबसे बड़ा कारण है कि भाजपा की मेयर प्रमिला पांडे ने दो भाजपा के ही पार्षदों को सदन से निलंबित कर दिया है. वहीं, भाजपा पार्षदों ने भी मेयर और उनके पुत्र के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए है. पार्षदों का आरोप है कि शहर में ‘बंटी टैक्स’ चल रहा है. बंटी, मेयर प्रमिला पांडे के पुत्र है. दोनों पार्षदों ने अपनी हत्या की आशंका भी जताई है. अपने निलंबन के खिलाफ पार्षदों ने हाईकोर्ट का रुख करने की बात भी कही है.
भाजपा पार्षद अंकित मौर्य और पार्षद पवन गुप्ता को मेयर प्रमिला पांडे ने अनुशासनहीनता के आरोप के नाम पर सदन की चार बैठकों से निलंबित कर दिया था. पवन गुप्ता ने बताया कि नगर निगम के अंदर महापौर के बेटे बंटी का पूरा दखल अंदाज रहता है. महापौर के सारे काम उनका बेटा ही संभालता है. यहां तक कि निगम से उठने वाले टेंडर, ठेके भी उन्हीं के इशारे पर उनके अपने लोगों को दिए जाते हैं. उनका ये आरोप भी है कि कुछ दलित बस्तियां ऐसी है जिस पर बंटी पाण्डेय की नजर है और वहां पर बस्ती को खाली कराने की साजिश चल रही है.
पार्षद ने तंज कसते हुए कहा- भाजपा के राज में होना चाहिए था कि ‘होइये वही जो राम रचि राखा’, लेकिन नगर निगम के चल रहा है कि ‘होइये वही जो बंटी रचि राखा’. मेयर प्रमिला पांडेय का पुत्र बंटी नियुक्ति, भर्ती, ठेके, टेंडर जैसे सभी कामों में दखल रखता है. यहां भ्रष्टाचार का बोलबाला है.
‘जब तक बंटी के दरबार जाकर…’
दोनों पार्षदों ने यह भी आरोप लगाया कि जब तक बंटी के दरबार में जाकर पैर नहीं छुएंगे तब तक किसी पार्षद का कोई काम नहीं हो सकता. पार्षद पवन गुप्ता ने तो मेयर को दलित विरोधी बताते हुए खुद की हत्या की आशंका भी जताई है. पार्षदों के गंभीर आरोपों के बाद कहां एक ओर हड़कंप मच गया है वहीं राजनीतिक गलियारों में भाजपा की आपसी खींचतान को लेकर भी काफी बातें हो रही है.

