प्रोफेसर थलप्पिल प्रदीपImage Credit source: @vinfutureprize
देश में साइंस और रिसर्च के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले वैज्ञानिकों को सम्मानित करने की कड़ी में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार 2025 प्रदान किए. इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 24 प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों को सम्मान मिला. इनमें केमिस्ट्री के क्षेत्र में नैनो टेक्नोलॉजी के माध्यम से जल शोधन को नई दिशा देने वाले आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर थलप्पिल प्रदीप भी शामिल हैं. उनके शोध और तकनीकों ने खासकर स्वच्छ पेयजल की समस्या से जूझ रहे लाखों लोगों के जीवन को बेहतर बनाया है.
नैनो टेक्नोलॉजी से जल शोधन में क्रांति
राष्ट्रपति द्वारा विज्ञान श्री श्रेणी के तहत सम्मानित प्रो. थलप्पिल प्रदीप देश के उन वैज्ञानिकों में गिने जाते हैं, जिन्होंने प्रयोगशाला के शोध को सीधे समाज की जरूरतों से जोड़ा. आईआईटी मद्रास के रसायन विज्ञान विभाग में प्रोफेसर और इंस्टीट्यूट प्रोफेसर के रूप में कार्यरत प्रदीप ने नैनो रसायन विज्ञान का उपयोग कर किफायती और प्रभावी जल शोधन तकनीकें विकसित की हैं.
उनकी अमृत जैसी तकनीकें पानी से आर्सेनिक, यूरेनियम और अन्य खतरनाक प्रदूषकों को हटाने में सक्षम हैं. खास बात यह है कि ये समाधान कम लागत वाले हैं, जिससे ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में भी स्वच्छ पानी उपलब्ध हो सका है. उनके काम से न केवल भारत बल्कि अन्य देशों में भी जल संकट से निपटने में मदद मिली है.
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान
प्रो. प्रदीप के योगदान को पहले भी कई बड़े सम्मानों से नवाजा जा चुका है. वर्ष 2020 में उन्हें विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिए पद्म श्री दिया गया था. इसके अलावा उन्हें शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार, TWAS पुरस्कार, निक्केई एशिया पुरस्कार और विनफ्यूचर पुरस्कार जैसे अंतरराष्ट्रीय सम्मान भी मिले हैं.
उनका शोध आणविक पदार्थ, सतहों के रसायन, नैनो कणों और जल-बर्फ जैसे आणविक ठोसों पर केंद्रित रहा है. उन्होंने सूक्ष्म बूंदों में नैनोकणों के निर्माण पर भी महत्वपूर्ण अध्ययन किया है. उनके नवाचारों से कई कंपनियां और व्यावहारिक जल समाधान विकसित हुए हैं, जिन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनाया जा रहा है.
प्रोफेसर थलप्पिल प्रदीप की शिक्षा
आईआईएससी बेंगलुरु से पीएचडी और पर्ड्यू विश्वविद्यालय से पोस्ट डॉक्टोरल अनुभव रखने वाले प्रो. प्रदीप आज उन वैज्ञानिकों में शामिल हैं, जिनका काम सीधे आम लोगों के जीवन को बेहतर बनाने में योगदान दे रहा है.
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