नवरतन कोरमा से लेकर शाही टुकड़े तक मुगलों की रसोई से निकले हैं.
भारतीय खान-पान की दुनिया दीवानी है और बात जब मुगलों की हो तो शाही अंदाज और शाही खान-पान सहसा मन में कौंध जाता है. मुगल भारत आए तो अपने साथ अपनी संस्कृति तो लाए ही, अपना खान-पान भी लेकर आए. चूंकि मुगलों का संबंध मध्य एशिया से लेकर फारस तक से था तो इनके मिश्रण से बने खान-पान को मुगलिया खान-पान का दर्जा मिला. आइए जान लेते हैं कि मुगलों की शाही रसोई से खाने-पीने की क्या-क्या चीजें मिलीं जो दुनिया भर में प्रसिद्ध हो गईं?
साल 1526 ईस्वी में पानीपत के मैदान में इब्राहिम लोदी को हराकर बाबर ने भारत में मुगल साम्राज्य की नींव रखी. मुगलों का शासन शुरू हुआ तो उनका खान-पान भी शाही रसोई में महकने लगा. इनमें जो सबसे चाव से खाया जाने वाला व्यंजन था, वह था बिरयानी.
जायकेदार बिरयानी
आज जो बिरयानी पूरी दुनिया में चाव से खाई जाती है, कम से कम भारत से उसका परिचय मुगलों ने ही करवाया था. बिरयानी चावल का मसालेदार पकवान होता है, जिसमें मांस, सीफूड और सब्जियां मिलाकर पकाया जाता है. बिरयानी में आमतौर पर बासमती चावल के अलावा मसालों में जावित्री, जायफल, काली मिर्च, दालचीनी, लौंग, छोटी-बड़ी इलायची, तेजपत्ता, धनिया, अदरक, लहसुन और प्याज का इस्तेमाल होता है. इसे देशी घी में पकाने की परंपरा रही है. इसको दही, चटनी, रायता, कोरमा, करी, उबले अंडे और सलाद के साथ परोसा जाता है.
फोटो: Pixabay
अब तो भारत के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग जायकों वाली बिरयानी मिलती है. इन इलाकों में बिरयानी पकाने का तरीका भी अलग है. इसके कारण इनको इलाके के हिसाब से पहचाना जाता है. उदाहरण के लिए हैदराबादी बिरयानी, कोलकाता बिरयानी, दिल्ली बिरयानी, सिंधी बिरयानी और मालाबार बिरयानी. बिरयानी के ही शाकाहारी रूप को तहरी कहा जाता है.
कबाब के क्या कहने
कबाब भी मुगल अपने साथ लेकर आए थे. इसके लिए मांस के छोटे-छोटे टुकड़े धागे में पिरोकर ग्रिल पर पकाए जाते हैं. इससे कबाब बनाया जाता है. मुगल शासक अपने साथ कबाब की एक-दो नहीं, ढेरों रेसिपी लेकर आए. इनमें सींक कबाब, शिकमपुर कबाब और रेशमी कबाब काफी प्रसिद्ध हैं. इन्हें अलग-अलग तरह की सामग्री के साथ पकाया जाता है.
फोटो: Pixabay
हलीम या खिचड़ा
मुगलों की ही देन है हलीम, जिसे भारत में खिचड़ा भी कहा जाता है. यह मूल रूप से तुर्की, ईरान, अजरबैजान और उत्तरी इराक का प्रसिद्ध व्यंजन है. आज यह भारत के हैदराबाद, तेलंगाना, औरंगाबाद और महाराष्ट्र के कई शहरों में काफी लोकप्रिय है. इसे गेहूं, दाल, जौ, अलग-अलग मसालों और कीमा से तैयार किया जाता है. इसे पकाने में सात-आठ घंटे लगते हैं.
ऐसे ही मसालों के साथ पका कर तैयार की गई गाढ़ी तरी को करी कहा जाता है. यह भी मुगल अपने साथ लेकर आए थे. इसका इस्तेमाल शाकाहारी और मांसाहारी दोनों ही तरह के व्यंजनों में किया जाता है. चिकन करी और अंडा करी तो काफी प्रसिद्ध है. करी की अलग-अलग कई तरह की रेसिपी मुगलों की देन है.
नवरतन कोरमा.
नवरत्न कोरमा और मुर्ग मुसल्लम
मुगलों की देन नवरतन कोरमा एक ऐसा व्यंजन है, जो शाकाहारी और मांसाहारी दोनों ही तरीके से बनाया जाता है. इसे नौ अलग-अलग सामग्री मिलाकर पकाया जाता है. वास्तव में यह एक बेहद स्वादिष्ट करी वाला व्यंजन है. इसमें ढेरों सूखे मेवे, सब्जियां, फल, क्रीम और सुगन्धित मसाले मिलाए जाते हैं. मुगलों का एक और पसंदीदा व्यंजन है मुर्ग मुसल्लम. इसमें पूरा मुर्गा अंडे, टमाटर, प्याज, अदरक, केसर, दालचीनी, खसखस, लौंग, मिर्च और इलायची जैसे मसालों को भरकर पकाया जाता है. मटन पसंद और रोगन जोश जैसे व्यंजन भी मुगलों की ही देन माने जाते हैं.
मुगलई पराठा.
रोटी और मुगलई पराठा
यह बात कौन मानेगा भला कि हर घर में बनने वाली रोटी अपने साथ मुगल लेकर आए थे. आमतौर पर गेहूं के आटे को गोल बेलकर तवे पर पकाई जाने वाली रोटी सब्जी के साथ परोसी जाती है. इसी तरह से मुगलई पराठे की भी खूब चर्चा होती है. दरअसल, मुगलई पराठा स्वादिष्ट और नरम तला पराठा होता है. इसे गेहूं के आटे में कीमा, अंडा, प्याज, हरी मिर्च और काली मिर्च सहित कई अन्य सामग्री भरकर तैयार किया जाता है. बंगाल में तो आज सबसे लोकप्रिय स्ट्रीट फूड मुगलई पराठा है.
शर्बत और आइसक्रीम
गर्मियों में गला तर करने वाला शर्बत हो या फिर बच्चों की सबसे पसंदीदा आइसक्रीम, दोनों ही मुगलों की देन हैं. शर्बत को फलों के रस, चीनी और पानी को मिलाकर बनाया जाता है. मुगल अपने साथ शरबत बनाने की कई विधियां लाए थे. शर्बत में गुलाब, केसर के साथ ही कई तरह के फ्लेवर का भी इस्तेमाल किया जाता है. इसी तरह से दूध और चीनी के साथ तरह-तरह के फ्लेवर और ड्राई फ्रूट आदि को मिलाकर तैयार की जाने वाली आइसक्रीम बच्चों से लेकर बड़ों तक सबको पसंद है. सबसे पसंदीदा और लोकप्रिय डेजर्ट में से एक आइसक्रीम के स्वाद से मुगलों ने ही हमें परिचित कराया.
मिठाइयां
मुगल अपने साथ कई तरह की मिठाइयां भी लेकर आए. इनमें से एक लोकप्रिय मिठाई है गुलाब जामुन. इसके लिए दूध से खोवा मावा तैयार किया जाता है. फिर देसी घी में तलकर चाशनी में डुबोया जाता है. इसके अलावा आज अलग-अलग ढंग से खाया जाने वाला पान भी मुगल मिठाई के रूप में भी इस्तेमाल करते थे. इसे खाने के बाद पाचक के रूप में खाया जाता था. शीर खुरमा और शाही टुकड़ा जैसी मिठाइयां भी मुगलों की ही देन हैं.
यह भी पढ़ें:बांग्लादेश: क्या शेख हसीना कोर्ट के फैसले को चुनौती देकर ICJ-UN जा सकती हैं?

