जयपुर बस हादसे की दर्दनाक तस्वीर
राजस्थान की राजधानी जयपुर में मंगलवार सुबह एक स्लीपर बस हादसे का शिकार हो गई है. हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से बस में आग लग गई, जिसकी चपेट में आने से तीन मजदूरों की जिंदा जलकर मौत हो गई है, जबकि 12 अन्य मजदूर बुरी तरह से झुलस गए. हादसे को लेकर अब कई सारी लापरवाही निकलकर सामने आई हैं. ये लापरवाही सिर्फ ड्राइवर या फिर कंडेक्टर के स्तर पर नहीं बल्कि आरटीओ स्तर पर भी देखी गई है.
जयपुर के मनोहरपुर थाना क्षेत्र टीडी गांव में मंगलवार सुबह मजदूरों से भरी स्लीपर बस हाईटेंशन तार की चपेट में गई है. इस दौरान करंट फैलने से बस की छत पर लदे तीन सिलेंडर ब्लास्ट कर गए, जिससे देखते ही देखते बस में भीषण आग लग गई. मजदूर जब तक स्थिति को समझते तब तक बस आग की जद में आ गई. इस दौरान कुछ मजदूरों ने भागकर जैसे-तैसे अपनी जान बचाई, लेकिन 3 मजदूरों की जिंदा जलकर मौत हो गई है.
12 मजूदर घायल
वहीं, 12 अन्य मजदूर गंभीर रूप से झुलस गए. हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई. स्थानीय लोगों की सूचना पर मनोहरपुर थाने की पुलिस मौके पर पहुंच गई. इसके बाद शाहपुरा और आसपास के इलाकों से फायर बिग्रेड की कई गाड़ियों को मौके पर आग बुझाने के लिए बुलाया गया है. उन्होंने घंटों की मेहनत के बाद आग पर काबू पाया और इसी बीच घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
9 आरटीओ टीम ने किया नजरअंदाज!
बस में करीब 70 मजदूर सवार थे, जो कि यूपी के पीलीभीत जिले से ईंट भट्टे पर काम करने के लिए पीलीभीत से जयपुर 10 घंटे में 529 किलोमीटर का सफर तय कर पहुंचे थे. रास्ते में यूपी की 2 और राजस्थान की 7 आरटीओ फ्लाइंग टीमें तैनात थी, लेकिन किसी ने बस को रोकने की कोशिश नहीं की. अगर आरटीओ ने अपना काम जिम्मेदारी से किया होता ये हादसा टल सकता था. जांच में सामने आया है कि स्लीपर बस मजदूरों से खचाखच भरी हुई थी.
अब तक हुए 40 चालान
बस का रोड टैक्स 30 सितंबर को ही खत्म हो गया था. इसके अलावा, ऑल इंडिया अस्थाई परमिट भी 21 अप्रैल तक ही थी. बस के चालान को लेकर भी अब कई बड़ी जानकारियां सामने आई हैं. हादसे का शिकार हुई बस के अब तक 40 चालान हो चुके हैं, जिनमें से 36 चालानों का जुर्माना 2,61,950 रुपए भरा जा चुका है. वहीं चार चालान अब भी बाकी हैं. चालानों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि बस परिवहन नियम के कई कानूनों को पहले भी तोड़ चुकी हैं.
