नीतीश कुमार.
राज्य में सत्तारूढ़ जनता दल यूनाइटेड ने बड़ी कार्रवाई की है. पार्टी से कई बड़े नाम को बाहर का रास्ता दिखा दिया है. पार्टी की तरफ से दी गई जानकारी के अनुसार इनमें मंत्री के साथ पूर्व विधायक और विधान पार्षद भी शामिल हैं. जदयू की तरफ से की गई इस कार्रवाई से पार्टी में हड़कंप मचा हुआ है. इन सभी के निष्कासन को लेकर के पार्टी के प्रदेश महासचिव और मुख्यालय प्रभारी एस्टेब्लिशमेंट चंदन कुमार सिंह की तरफ से सूचना भी जारी कर दी गई है.
पार्टी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार पार्टी से निष्कासित किए गए वरीय नेताओं में पूर्व मंत्री शैलेश कुमार, पूर्व विधान पार्षद संजय प्रसाद, बड़हरिया से पार्टी के पूर्व विधायक श्याम बहादुर सिंह, बरहरा भोजपुर से पूर्व विधान परिषद रणविजय सिंह, बरबीघा से पार्टी के पूर्व विधायक सुदर्शन कुमार के नाम शामिल है. इसके अलावा बेगूसराय के अमर कुमार सिंह, वैशाली से डॉक्टर आसमा परवीन, औरंगाबाद के नबीनगर से लव कुमार, कदवा कटिहार से आशा सुमन, मोतिहारी पूर्वी चंपारण से दिव्यांशु भारद्वाज और जीरादेई सिवान से विवेक शुक्ला को भी पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है.
जदयू छोड़कर कई निर्दलीय मैदान में उतरे
बता दे कि इसके पहले हम पार्टी की तरफ से बड़ी कार्रवाई की गई थी. हम पार्टी ने भी पार्टी विरोधी गतिविधियों को देखते हुए अपने कई बड़े नेताओं को बाहर का रास्ता दिखा दिया था. पहले चरण की ठीक पहले जदयू की तरफ से की गई इस बड़ी कार्रवाई की अब हर तरफ चर्चा हो रही है. सूत्रों के अनुसार, इन नेताओं में से कुछ को आगामी विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं मिला था, जिसके चलते पार्टी नेतृत्व के खिलाफ नाराजगी बढ़ती जा रही थी. कई नेताओं ने जदयू से अलग होकर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरने का फैसला किया था.
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में पार्टी विरोधी आचरण व गतिविधियों में संलिप्तता के कारण निम्न सदस्यों को निलंबित करते हुए पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित किया जाता है।
यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा। pic.twitter.com/cWB3518lLr— Janata Dal (United) (@Jduonline) October 25, 2025
जदयू ने की संगठन को मजबूत करने की कोशिश
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि चुनाव से पहले अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी. पार्टी संगठन अब केवल उन लोगों के साथ आगे बढ़ेगा जो जदयू की विचारधारा, नेतृत्व और नीतियों के प्रति निष्ठावान हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम जदयू के लिए ‘डैमेज कंट्रोल’ रणनीति का हिस्सा है, जिससे आगामी चुनाव में एकजुटता का संदेश दिया जा सके.
