सबरीमाला का मतलब है शबरी की पहाड़ियां, जिसका जिक्र रामायण में भी किया गया है.
केरल की पहाड़ियों पर बना सबरीमाला मंदिर चर्चा में है. चर्चा की दो वजह हैं. पहली, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का दौरा और दूसरी सोने की चोरी के मामले में जांच का आदेश. केरल हाईकोर्ट ने मंदिर में सोने की चोरी के मामले में SIT जांच का दायरा बढ़ाकर त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (TDB) के अधिकारियों की भूमिका की जांच करने का निर्देश दिया है.
सबरीमाला मंदिर भगवान अयप्पा को समर्पित है. किंवदंती यह भी है कि भगवान अयप्पा अविवाहित हैं और उन्होंने ब्रह्मचर्य की शपथ ली थी. मान्यता है कि भगवान अयप्पा भगवान शिव और भगवान विष्णु के अवतार मोहिनी के पुत्र हैं. यही वजह है कि उन्हें एक राक्षसी को हराने की क्षमता मिली. उसे पराजित करने पर पता चला कि वो वास्तव में एक युवती थी जिसे राक्षसी जीवन जीने का श्राप मिला था.
राक्षसी का वो प्रेम और महिलाओं के प्रवेश पर रोक
वह उनसे प्रेम करने लगी थी और विवाह करने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने यह कहते हुए मना कर दिया कि उन्हें जंगल में जाकर अपने भक्तों की प्रार्थनाओं का उत्तर देना है. वह जिद पर अड़ी रही, तो उन्होंने कहा कि जिस दिन भक्त उनका आशीर्वाद लेने आना बंद कर देंगे, उसी दिन वह उससे विवाह कर लेंगे, पर ऐसा कभी नहीं हुआ.
2023-24 में 50 लाख श्रद्धालु सबरीमाला मंदिर पहुंचे.
किंवदंती यह भी है कि वह एक दूसरे मंदिर में उनकी प्रतीक्षा करती है, जो मुख्य सबरीमाला मंदिर के रास्ते में स्थित है. महिलाएं किसी भी मंदिर में नहीं जातीं क्योंकि मान्यता है कि ऐसा करने से देवता और उनसे प्रेम करने वाली महिला के बलिदान, दोनों का अपमान होगा.
भगवान अयप्पा ने हर भक्त की प्रार्थना का उत्तर देने की शपथ ली औार महिलाओं के साथ संपर्क समेत सभी सांसारिक इच्छाओं का त्याग कर दिया, यही कारण है कि उनके मंदिर में महिलाओं को प्रवेश की अनुमति नहीं है.
सबरीमाला मंदिर को पहलेसबरीमाला श्री धर्म संस्था मंदिर कहा जाता था.फोटो: Getty Images
कैसे मिला सबरीमाला नाम?
सबरीमाला का मतलब है शबरी की पहाड़ियां, जिसका जिक्र रामायण में भी किया गया है. आधिकारिकतौर पर21 नवंबर, 2016 को, केरल के इस मंदिर को सबरीमाला श्री अय्यप्पास्वामी मंदिर नाम दिया गया. इससे पहले इसे सबरीमाला श्री धर्म संस्था मंदिर कहा जाता था. हालांकि, इसे सबसे ज्यादा सबरीमाला मंदिर के नाम से ही जाना गया.
इसका मतलब भगवान राम की भक्त शबरी से है. कहा जाता है कि भगवान राम माता सीता को रावण की कैद से छुड़ाने के लिए लंका जाते समय इसी वन में शबरी से मिलने गए थे. शबरी ने भगवान राम को वो बेर खिलाए जो उन्होंने मीठे होने के कारण चखे थे. मान्यता है कि जिस पहाड़ी वन में भगवान राम ने शबरी से भेंट की थी, उसका नाम शबरीमाला था. उनकी मृत्यु के बाद अनुयायियों ने उस स्थान पर एक मंदिर का निर्माण कराया जहां उन्होंने भगवान राम का स्वागत किया था. इस मंदिर का नाम सबरीमाला मंदिर इसलिए पड़ा क्योंकि शबरी को इसके निर्माण का मुख्य कारण माना जाता है.
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