नोएडा और ग्रेटर नोएडा में तेजी से बढ़ती आबादी और वाहनों की संख्या के बाद कार वॉशिंग सेंटरों की संख्या बढ़ती जा रही है. हालांकि इन मांग को पूरा करने के चक्कर में कई अवैध सेंटर बन गए हैं. जानकारी के मुताबिक सिर्फ नोएडा में 400 से अधिक छोटे-बड़े वॉशिंग सेंटर चल रहे हैं, जो किसी भी तरह के नियमों का पालन नहीं करते हैं. इनमें से अधिकांश के पास न तो भूजल उपयोग करने की अनुमति है और न ही इस दौरान निकले वाले जल शोधन संयंत्र (एटीपी) जैसी बुनियादी सुविधाएं.
दरअसल, नोएडा में कार धुलाई और धड़ल्ले से चल रहे भूजल का अंधाधुंध दोहन अब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ( एनजीटी ) के निशाने पर आ गए है. धुलाई और भूजल का अंधाधुंध दोहन करने वालों के लिए प्रदूषण विभाग ने एक रिपोर्ट जारी की थी. रिपोर्ट के बाद नोएडा और ग्रेटर नोएडा में लगभग 180 सेंटरों की बिजली काट दी गई है. एनजीटी के आदेश के बाद की गई इस कार्रवाई की रिपोर्ट अगली सुनवाई में पेश की जाएगी, जिसके बाद इन्हें तोड़े जाने की भी कार्रवाई की जा सकती है.
एक कार धोने में बर्बाद होता है 500 लीटर पानी
दरअसल, एक छोटी कार धोने में 150 से 200 लीटर तक पानी खर्च होता है, जबकि बढ़ी गाड़ियों के लिए यह 300 से 500 लीटर तक पहुंच जाता है. इस तरह हर दिन लाखों लीटर भूजल बिना किसी रीसाइक्लिंग किए सीधे नालियों में बहा दिया जाता है, जिससे इन इलाकों में भूजल स्तर लगातार गिर रहा है और इसकी गुणवत्ता भी खराब हो रही है.
अवैध सेंटरों पर होगी कार्रवाईवहीं
प्रदूषण विभाग की रिपोर्ट में इन सेंटरो द्वारा किए जा रहे उल्लंघन को विस्तार से सामने रखा. जिसके बाद एनजीटी ने इस रिपोर्ट पर तत्काल कार्रवाई का आदेश दिया था. वहीं इसके बाद 180 सेंटरों की बिजली काट दी गई. दरअसल, बिजली काटने का मकसद सिर्फ इन सेंटरो का संचालन बंद करना है. हालांकि बिजली काटना ही इसका समाधान नहीं है, क्योंकि अधिकांश अवैध सेटरों के पास जनरेटर की सुविधा होती है, जिससे बिजली कटने के बाद भी अपना काम शुरू रख सकते हैं.
हालांकि प्रशासन ने इन सेंटरों को बंद करने की सख्त हिदायत दी है. इसके अलावा ये चेतावनी भी दी गई है कि अगर बिजली कटने के बाद भी इन कार धुलाई सेंटरों का संचालन बंद नहीं हुआ, तो उनके सेंटरों को तोड़ने की कार्रवाई की जाएगी. वहीं एनजीटी में अगली सुनवाई के दौरान इस कार्रवाई की रिपोर्ट पेश की जाएगी, जिसके बाद इन अवैध सेटरों को नष्ट करने पर आखिरी फैसला लिया जाएगा.
पहले भी हो चुकी है कार्रवाई
दो साल पहले भी नोएडा अथॉरिटी, जल विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने मिलकर अवैध तरीके से चलाए जा रहे धुलाई सेंटरों के खिलाफ संयुक्त अभियान चलाया था. इस दौरान दर्जनों वॉशिग सेंटरों को सील किया गया था. हालांकि कुछ समय बाद ये सेंटर फिर से चालू हो गए थे.
क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी रितेश तिवारी ने कहा कि नोएडा में कार वॉशिंग सेंटरों की बिजली काटे जाने की कार्रवाई की गई है. इन सेंटरों के संचालकों को हिदायत दी गई है. एनजीटी में अगली सुनवाई डेढ़ महीने बाद होनी है. सुनवाई के दौरान रिपोर्ट एनजीटी के सामने पेश की जाएगी. इस दौरान अवैध तरीके से चल रहे धुलाई सेंटरों पर कार्रवाई करने का अंतिम निर्णय लिया जाएगा.
