भारत की वायु सेना जब 19 देशों के सामने राफेल उड़ाएगी तो पूरा दुनिया देखेगा। ऑस्ट्रेलिया की सरजमी पर क्या कुछ होने वाला है? भारत का राफेल क्या-क्या करने वाला है? भारत के साथी देश लगातार भारत के साथ अपने साझेदारी को मजबूत कर रहे हैं। उसकी सेना से लगातार संपर्क में हैं। डिफेंस कोऑपरेशन बढ़ा रहे हैं। जिसके जरिए अपनी सैन्य शक्तियों को वो भी मजबूत कर पाए। नए-नए तौर तरीके उनकी भी सेना सीख पाए। ऑपरेशन सिंदूर में वायुसेना ने क्या कमाल किया यह तो आपको मालूम है। जिस तरह की बॉम्बिंग हुई और जिस तरह से पाकिस्तान के परखच्चे उड़ गए उसके एयर बेसेस उड़ा दिए गए। लड़ाकू विमान उड़ा दिए गए। एसओ ने जिस तरह का कमाल किया वक्स उड़ाया और चाइना के जेट्स मारे। जिस तरह का परफॉर्मेंस रहा है उसको लेकर जो है अब यहां बात होगी कि किस तरह से भारत ने यह कमाल दिखाया है। भारतीय वायु सेना की एक जो टीम है वो एक्सरसाइज पिच ब्लैक 2026 में हिस्सा लेने के लिए ऑस्ट्रेलिया पहुंची हुई है। यह दुनिया के सबसे बड़े हवाई सैन्य अभ्यासों में से एक है। इस बार इसमें 19 देशों की वायु सेनाएं शामिल हो रही हैं।
भारत इस अभ्यास में अपने राफेल लड़ाकू विमानों के साथ पहुंचा हुआ है हिस्सा लेने के लिए। इसका मकसद दूसरे देशों की एयरफोर्स के साथ मिलकर अभ्यास करना है। युद्ध जैसी परिस्थिति में बेहतर तालमेल कैसे हो? कैसे एयर टीविंग हो पाए? इसे और नए तरीके से कैसे सीखा जाए यह सब कुछ 19 देशों के साथ भारत करने वाला है और इसके लिए भारत ने अपने सबसे अत्याधुनिक फाइटर जेट राफेल को वहां भेजा है। यह अभ्यास हर दो साल में ऑस्ट्रेलिया की रॉयल ऑस्ट्रेलियन एयरफोर्स कराती है। भारतीय वायुसेना के मुताबिक इस दौरान राफेल कई तरह के मिशन में हिस्सा लेगा। इससे दूसरे देशों की एयरफोर्स के साथ मिलकर काम करने का अनुभव मिलेगा। फ्यूचर के संयुक्त ऑपरेशन के लिए तैयारी बेहतर होगी। भारत बीते कुछ सालों से दुनिया के बड़े से अन्य अभ्यासों में लगातार हिस्सा ले रहा है। इससे भारतीय वायुसेना को नई तकनीक, नए ऑपरेशन और दूसरे देशों के काम करने के तरीकों को करीब से समझने का मौका मिल रहा है। एक्सरसाइज पिच ब्लैक की बात करें तो ऑस्ट्रेलिया का यह सबसे बड़ा मल्टीीनेशनल हवाई सैन्य अभ्यास है।
इसकी शुरुआत 1981 में हुई। पहले इसमें कम देश शामिल थे। लेकिन अब यह दुनिया के बड़े एयर कॉम्बैट अभ्यासों में गिना जाता है। इसमें लड़ाकू विमान, ट्रांसपोर्ट विमान, टैंकर विमान, हजारों सैन्यकर्मी हिस्सा लेते हैं। भारतीय वायुसेना इस अभ्यास में अपने राफेल लड़ाकू विमानों के साथ हिस्सा ले रही है। राफेल भारत के सबसे आधुनिक फाइटर जेट्स में से एक है। अभ्यास के दौरान भारतीय पायलट दूसरे देशों के पायलट के साथ मिलकर मिशन के लिए लड़ाकू विमान उड़ाएंगे। इससे अलग-अलग हालात में काम करने का अनुभव मिलेगा और जरूरत पड़ने पर दूसरे देशों के साथ बेहतर तालमेल बनाना आसान होगा। इस बार इस अभ्यास में 19 देशों की वायु सेनाएं शामिल हो रही हैं। सभी देश मिलकर हवाई मिशन इससे एक दूसरे के काम करने का तरीका समझेंगे और बताया जाता है कि सभी देश जो मिलकर हवाई मिशन करेंगे, ऑपरेशन की योजना तैयार करेंगे, संचार करेंगे, युद्ध जैसी स्थिति में एक साथ कैसे काम किया जाए इसका अभ्यास करेंगे।
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