भारत के लिए यह एक तरह के खतरे की भी दस्तक हो सकती है। क्योंकि जो ख्वाब बांग्लादेश में मौजूदा सरकार से पहले जो सरकार थी उसने देखा था। यानी कि भारत के चिकन नेक को डिस्टर्ब करने का जो सपना मोहम्मद यूनुस ने देखा था। भारत के नॉर्थ ईस्टर्न स्टेट को लेकर जो एक भड़काऊ ख्याल मोहम्मद यूनुस ने चीन को भेजा था। उसको ऐसा लगता है कि तारीख रहमान आगे बढ़ाना चाहते हैं। दरअसल चीन के दौरे पर पहुंचे बांग्लादेश के पीएम तारीख रहमान ने तीस्ता प्रोजेक्ट को लेकर जो समझौता किया है उसने खतरे की घंटी बजा दी है। बता दें कि जो रिपोर्ट सामने आ रहे हैं और जो जानकारी सामने आ रही है उसके मुताबिक बांग्लादेश और चीन ने तीस्ता नदी में मैनेजमेंट के सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त कर दी है। यानी कि बांग्लादेश और चीन मिलकर तीस्ता प्रोजेक्ट पर काम करते हुए दिखाई देंगे उसके मैनेजमेंट में।
बांग्लादेश और चीन जो है वह तीस्ता और दूसरी नदियों के मैनेजमेंट सहयोग बढ़ाने पर सहमत हुए हैं। सरकारी न्यूज़ एजेंसी जो बांग्लादेश की है बांग्लादेश सबाद संस्था बीएसएस उसकी रिपोर्ट कहती है कि यह समझौता तब हुआ जब चीन के जल संसाधन मंत्री ली गोइंग ने बीजिंग में बांग्लादेश के पीएम तारिक रहमान से मुलाकात की। इस साल पद संभालने के बाद अपनी पहली विदेशी यात्रा के लिए मलेशिया को चुनने वाले रहमान 22 जून को कोलालमपुर से चीन के डालियान शहर पहुंचे जहां उन्होंने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया। उसके बाद वह डलियान से हाई स्पीड ट्रेन से बीजिंग पहुंचे और जानकारी यह है कि उनकी कई अहम मुलाकातें होनी है और इन सबके बीच तीस्ता को लेकर जो जानकारी सामने आई वह काफी चिंताजनक है। क्योंकि रिपोर्ट में कहा गया है कि ली के साथ बैठक में रहमान ने बाढ़ के जोखिम को कम करने, पर्यावरण की रक्षा करने, जल संसाधनों के उचित मैनेजमेंट को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बांग्लादेश में चल रहे नदी खुदाई कार्यक्रम पर जोर दिया। इसी सिलसिले में उन्होंने बांग्लादेश के जल संसाधन मैनेजमेंट को बेहतर बनाने के लिए चीन का सहयोग मांगा।
रिपोर्ट के मुताबिक रहमान ने तीस्ता मैनेजमेंट प्रोजेक्ट में चीन से तकनीकी सहायता भी मांगी है। इसमें कहा गया है जो जवाब में कि चीनी मंत्री ने जल संसाधन मैनेजमेंट में बांग्लादेश सरकार की पहलों में पूरा सहयोग देने का भरोसा दिलाया। 2005 में ढाका और बीजिंग के बीच जो एमओयू पर हस्ताक्षर हुआ। बीते साल चीनी जल विशेषज्ञों की बांग्लादेश यात्रा का जिक्र करते हुए ली ने कहा कि जल संसाधन मैनेजमेंट में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग व्यवहारिक और अनुसंधान आधारित है। रिपोर्ट में जानकारी दी गई कि रहमान ने नदी के किनारे के कटाव को रोकने, सिंचाई प्रणालियों को बेहतर बनाने और बांग्लादेश में अंतर देशय जल नेविगेशन को बढ़ाने में चीन से सहायता मांगी है। इसमें कहा गया है कि चीनी मंत्री ने बांग्लादेश जल मैनेजमेंट में चीन के अनुभव से लाभ उठाने के लिए कहा है। कहा है कि बांग्लादेशी जल विशेषज्ञ और संबंधित अधिकारियों को चीन में प्रशिक्षण लेने के लिए हम बुलाएंगे भी।
तीस्ता प्रोजेक्ट को लेकर क्यों हर बार हमारे कान खड़े हो जाते हैं? इसमें जो भारत वाला एंगल है। तीस्ता प्रोजेक्ट जो है वो भारत बांग्लादेश संबंधों में एक बहुत संवेदनशील मुद्दा है। जिसमें फरवरी में रहमान की सरकार के सत्ता संभालने के बाद सुधार के संकेत दिए थे। रहमान की सरकार ने मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार से थोड़े समय के शासन को खत्म किया। जिसके दौरान नई दिल्ली और ढाका संबंधों में भरपूर गिरावट आई। बीएसएस की रिपोर्ट के मुताबिक बीते महीने जब विदेश मंत्री खलील उर रहमान ने बीजिंग का दौरा किया तो रहमान सरकार ने तीस्ता नदी के जीर्णोद्धार प्रोजेक्ट के लिए औपचारिक रूप से चीन की भागीदारी और समर्थन मांग ली थी। तीस्ता नदी पूर्वी हिमालय से निकलकर सिक्किम और पश्चिम बंगाल से होते हुए बांग्लादेश में प्रवेश करती है। जहां लाखों लोगों के लिए सिंचाई और आजीविका का यह मुख्य स्रोत है।
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