बुजुर्गों ने एक बड़े पते की बात कही थी कि आस्तीन में सांप पालोगे तो डसने का डर हमेशा रहेगा। आज पाकिस्तान ने दशकों तक जिस उग्रवाद और कट्टरपंथ को अपनी रणनीतिक बढ़त के लिए इस्तेमाल किया आज वही सांप पाकिस्तान की रियासत को डस रहा है। और जब पाकिस्तान ने इन सांपों को कुचलने के लिए अफगानिस्तान की सरजमी पर बमबारी की एयर स्ट्राइक की तो उसने एक ऐसे भैया तालिबान को जगा दिया जो पीछे हटने वालों में से नहीं है। पाकिस्तानी एयरफोर्स के जेट्स ने रविवार की काली रात में जो आग बरसाई उसमें 35 बेगुनाह जिंदगियां खाक हो गई अफगानिस्तान की और तालिबान का गुस्सा सातवें आसमान पर है और असीम मुनीर की सेना अब सीधे निशाने पर है। दरअसल रविवार की रात जब लोग सो रहे थे तब आसमान से पाकिस्तानी विमानों ने मौत का सामान गिराया। यह हमले अफगानिस्तान के बख्तियागा प्रांत के गयान और समकानी जिले और कुनार प्रांत के मरवारा जिले को निशाना बनाया गया।
पुलिस कमांड के प्रवक्ता जदान ने जो आंकड़े पेश किए हैं, वह रूह कपा देने वाले हैं। अकेले समकानी जिले में 35 लोगों की जान जाने की पुष्टि हुई है। इनमें पुरुष नहीं है बल्कि वे मासूम बच्चे थे जो शायद टीटीपी का नाम तक नहीं जानते थे। 40 से ज्यादा लोग अस्पतालों में जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे हैं और वजह है पाकिस्तानी सेना। चश्मदीदों का कहना है कि धमाके इतने भीषण थे कि कई मकानों के मलबे ढह गए। तालीबान सरकार के सबसे ताकतवर प्रवक्ता जबी उल्ला मुजाहिद ने बयान जारी किया जो सुबह उन्होंने जारी किया उसने आग में घी डालने का काम किया। उन्होंने इसे पाकिस्तान का कायरतापूर्ण और अपराधिक कृत्य बताया। मुजाहिद ने साफ लफ्जों में कहा कि पाकिस्तान अपनी घरेलू नाकामियों को छिपाने के लिए अफगान औरतों और बच्चों का खून बहा रहा है। मुजाहिद ने सीधे तौर पर पाकिस्तानी सेना और सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि इस तरह की आक्रमकता का अंजाम बहुत बुरा होगा। तालीबान का कहना है कि वे अपनी जमीन की संप्रभुता की रक्षा करना अच्छे से जानते हैं। यह सिर्फ एक बयान नहीं बल्कि एक अल्टीमेटम है जो जनरल आसिम मुनीर की रातों की नींद उड़ाने के लिए काफी है।
दरअसल पाकिस्तान का दावा है कि उन्होंने टीटीपी यानी कि तहरीक तालिबान पाकिस्तान के ठिकानों पर प्रहार किया है और 29 खूंखार लड़ाकों को मार खिलाया। अब पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने इसे कराची में पैरामिलिट्री रेंजर्स पर हुए हमले का प्रतिशोध बताया। लेकिन यहां एक बड़ा विरोधाभास है। पाकिस्तान कहता है कि आतंकी मारे गए। अफगानिस्तान कहता है कि आम नागरिक मारे गए और हकीकत यह है कि जब हवाई हमले होते हैं तो अक्सर कोलटरल डैमेज के नाम पर बेगुनाह की बलि चढ़ती है और यही वो बिंदु है जहां से नफरत की नई फसल पैदा होती है। पाकिस्तान पिछले साल अक्टूबर से लगातार सीमा पार हमले कर रहा है। लेकिन क्या इससे टीटीपी खत्म हुई? जवाब है नहीं। टीटीपी के हमले पाकिस्तान के भीतर और ज्यादा बढ़ गए हैं।
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