साइबर अपराधी लगातार नए-नए तरीकों से लोगों को निशाना बना रहे हैं। अब दूरसंचार विभाग (DoT) ने एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय स्कैम को लेकर चेतावनी जारी की है, जिसमें जालसाज Caller ID Spoofing तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस तकनीक के जरिए स्कैमर्स किसी भी कॉल के असली नंबर को छिपाकर उसे किसी दूसरे नंबर के रूप में दिखा देते हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ये कॉल इंटरनेशनल होने का दावा करती हैं, लेकिन मोबाइल स्क्रीन पर नंबर की शुरुआत भारतीय कंट्री कोड +91 से दिखाई देती है।
क्या है यह नया कॉलिंग स्कैम?
हाल के दिनों में कई मोबाइल यूजर्स को ऐसे फोन कॉल मिल रहे हैं जो खुद को विदेशी कॉल बताते हैं। हालांकि, जब यूजर कॉलर आईडी देखता है तो नंबर भारतीय कोड +91 के साथ दिखाई देता है। यही भ्रम पैदा करके साइबर अपराधी लोगों को अपने जाल में फंसाने की कोशिश करते हैं।
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दूरसंचार विभाग के अनुसार, किसी भी वास्तविक अंतरराष्ट्रीय कॉल में उस देश का कंट्री कोड दिखाई देता है, जहां से कॉल की जा रही है। ऐसे में यदि कोई कॉल इंटरनेशनल होने का दावा करे लेकिन नंबर +91 से शुरू हो, तो उसे संदेह की नजर से देखना चाहिए।
कैसे काम करती है Caller ID Spoofing तकनीक?
Caller ID Spoofing एक ऐसी तकनीक है, जिसमें कॉल करने वाला व्यक्ति अपने असली नंबर को छिपाकर किसी दूसरे नंबर को स्क्रीन पर दिखा सकता है। साइबर अपराधी इसी तकनीक का फायदा उठाकर भरोसेमंद दिखने वाले नंबरों से लोगों को कॉल करते हैं। कई बार ये खुद को टेलीकॉम विभाग का अधिकारी, पुलिस कर्मचारी, बैंक प्रतिनिधि, कूरियर एजेंट या ग्राहक सेवा अधिकारी बताकर बातचीत शुरू करते हैं। उनका उद्देश्य लोगों का विश्वास जीतना और फिर संवेदनशील जानकारी हासिल करना होता है।
डर और दबाव बनाकर करते हैं ठगी
साइबर ठग अक्सर लोगों को डराने और घबराने की रणनीति अपनाते हैं। कॉल के दौरान कहा जा सकता है कि आपका सिम कार्ड बंद होने वाला है, बैंक खाता ब्लॉक हो जाएगा, कोई कानूनी कार्रवाई शुरू हो चुकी है या आपके नाम से कोई संदिग्ध पार्सल पकड़ा गया है। ऐसी परिस्थितियों में कई लोग घबरा जाते हैं और बिना सोचे-समझे अपनी निजी जानकारी साझा कर देते हैं। यही जानकारी बाद में बैंक खाते से पैसे निकालने या डिजिटल पहचान की चोरी करने के लिए इस्तेमाल की जाती है।
किन जानकारियों पर रहती है स्कैमर्स की नजर?
साइबर अपराधियों का मुख्य लक्ष्य आपकी गोपनीय और वित्तीय जानकारी हासिल करना होता है। इनमें शामिल हैं:
– OTP (वन टाइम पासवर्ड)
– ATM या डेबिट कार्ड PIN
– नेट बैंकिंग पासवर्ड
– UPI PIN
– आधार नंबर और उससे जुड़ी जानकारी
– क्रेडिट कार्ड डिटेल्स
याद रखें कि कोई भी सरकारी विभाग, बैंक या अधिकृत संस्था फोन पर ऐसी जानकारी नहीं मांगती।
इन संकेतों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
यदि कोई कॉल करने वाला जल्दी-जल्दी निर्णय लेने का दबाव बना रहा हो, कानूनी कार्रवाई की धमकी दे रहा हो या किसी लिंक पर तुरंत क्लिक करने को कह रहा हो, तो यह साइबर फ्रॉड का संकेत हो सकता है। इसके अलावा यदि कॉल की भाषा असामान्य हो, सामने वाला व्यक्ति बार-बार गोपनीय जानकारी मांग रहा हो या भुगतान करने के लिए कह रहा हो, तो तुरंत सतर्क हो जाएं।
खुद को ऐसे रखें सुरक्षित
संदिग्ध लिंक से रहें दूर
किसी भी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजे गए लिंक पर क्लिक न करें। ऐसे लिंक आपको फर्जी वेबसाइट पर ले जाकर आपकी निजी जानकारी चुरा सकते हैं।
मिस्ड कॉल पर वापस कॉल न करें
यदि किसी अनजान या संदिग्ध अंतरराष्ट्रीय नंबर से मिस्ड कॉल आती है, तो उस पर वापस कॉल करने से बचें। कई बार ऐसे नंबरों पर कॉल करने से अतिरिक्त शुल्क भी लग सकता है।
निजी जानकारी साझा न करें
OTP, PIN, पासवर्ड, बैंकिंग डिटेल्स या आधार से जुड़ी जानकारी किसी भी व्यक्ति के साथ फोन पर साझा न करें, चाहे वह खुद को अधिकारी ही क्यों न बताए।
संचार साथी पर करें शिकायत
यदि आपको ऐसा कोई संदिग्ध कॉल प्राप्त होता है, तो उसकी रिपोर्ट सरकार के संचार साथी (Sanchar Saathi) प्लेटफॉर्म पर करें। इससे संबंधित एजेंसियों को ऐसे नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई करने में मदद मिलती है।
जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव
विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक जितनी तेजी से आगे बढ़ रही है, साइबर अपराधी भी उतनी ही तेजी से नए तरीके खोज रहे हैं। ऐसे में सतर्कता और जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है। यदि कोई कॉल असामान्य लगे, तो उस पर भरोसा करने के बजाय पहले उसकी सत्यता जांचें। एक छोटी सी सावधानी आपको बड़े आर्थिक नुकसान और पहचान चोरी जैसे खतरों से बचा सकती है।
– डॉ. अनिमेष शर्मा

