मिडिल ईस्ट एक्सपर्ट कहते हैं कि इजरायल के लिए अमेरिका कुछ भी कर सकता है और अमेरिका के बिना इजरायल कुछ नहीं है। जून 2025 में 12 दिनों की जंग में इसराइल के लिए आखिर में अमेरिका खड़ा हो गया था। और 2026 की 40 दिनों की जंग भी अमेरिका इजरायल ने मिलकर लड़ी ईरान के खिलाफ। इजरायल के लिए ही अमेरिका अपनी जंगी बेड़े से लेकर सारा साजो सामान अरब देशों की जमीन और समंदर में रखता है। यानी इसराइल अमेरिका के लिए सब कुछ है। प्रेसिडेंट ट्रंप ने इजरायल की मोहब्बत में कुछ ऐसा ही किया है। अरब और मुस्लिम देशों के साथ। दरअसल ट्रंप ने सऊदी, क़तर, पाकिस्तान को दो टूक कह दिया है कि वो इजरायल को स्वीकार करें, उसे मान्यता दें। उसके साथ समझौता करें। अब मुस्लिम देशों के सामने तो बड़ा धर्म संकट खड़ा हो गया है। ट्रंप को देखें या फिर अपनी आवाम की भावनाओं को। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शनिवार को ट्रंप ने सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, पाकिस्तान, तुर्की, मिस्र, जॉर्डन और बहरीन के लीडर्स के साथ फोन पर बात की। इसमें ट्रंप ने ऐसी बात कही जिससे हर लीडर चौंक गया और कुछ पल के लिए फोन कॉल में सन्नाटा छा गया।
ट्रंप ने कहा कि ईरान जंग खत्म होने के बाद अगला कदम होगा कि अरब और मुस्लिम देश इसराइल से समझौता सामान्य करें और अब्राहम अकॉर्ड में शामिल हो। ट्रंप ख्ते के अरब मुल्कों और डील में सहयोग कर रहे पाकिस्तान, तुर्की वगैरह के साथ फोन पर चर्चा कर रहे थे। लेकिन इसी बातचीत में ट्रंप ने अचानक नया मुद्दा उठा दिया। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक ट्रंप ने नेताओं से कहा कि वह अब इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू को फोन करने जा रहे हैं और उम्मीद करते हैं कि जल्द ही इजरायल के लीडर भी इसी तरह की कॉल में सबके साथ शामिल होंगे। फिर क्या था यूएई को छोड़कर बाकी अरब और मुस्लिम देशों के नेताओ को काटो तो खून नहीं। ट्रंप के सामने कुछ बोले तो फंसे और अगर ना बोले तो मुसीबत। ट्रंप के इजरायल के साथ समझौते का जिक्र करते हुए एक चुप्पी छा गई। वक्त बदल गया, हालात बदल गए। खासकर सऊदी अरब, क़तर और पाकिस्तान जैसे देशों के नेता जिनके इजरायल के साथ औपचारिक कूटनीतिक रिश्ते नहीं है।
ट्रंप की इस मांग से वो लोग हैरान रह गए। पाकिस्तान जैसे कथित इस्लामिक देशों की तो पूरी इंटरनेशनल सियासत ही इजरायल के खिलाफ बेस्ड है। वो तो बुरे फंस गए हैं। पाकिस्तान की इजरायल से नफरत को इसी आधार पर समझा जा सकता है कि उसके पासपोर्ट पर लिखा है कि पाकिस्तान इजरायल को नहीं मानता है। एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि लाइन पर कुछ देर के लिए खामोशी छा गई। तब ट्रंप ने मजाक में पूछा कि क्या आप लोग अभी भी लाइन पर हैं? तब जाकर मुस्लिम देश कुछ सहज हुए। ट्रंप ने यहां तक इशारा कर दिया कि एक दिन ईरान भी अब्राहम समझौते में शामिल हो सकता है। एक्सपर्ट कहते हैं कि ईरान में इस्लामिक रेवोल्यूशन की सरकारों के रहते यह मुमकिन नहीं है क्योंकि 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद से ही ईरान की फॉरेन पॉलिसी में फिलिस्तीन की आजादी शामिल है।
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